बिहार राज्य से अनिल कुमार बिहार मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि प्रखंड के घाटकुसुम्भा और गगौर में अन्नप्राशन दिवस का आयोजन किया गया । इस मौके पर आईसीडीएस के डीपी तृप्ति सिन्हा तथा पीरामल फाउंडेशन के जिला प्रभारी विशाल कुमार के द्वारा घाटकुसुम्भा तथा गगौर गांव का भ्रमण किया गया । जहाँ एक ओर कोविड -19 संक्रमण के कारण बच्चे आंगनवाड़ी केंद्रों द्वारा गर्म पका हुआ भोजन से वंचित हो रहे हैं। लोगों को अपने घरों में बच्चों के खान पान एवं स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने की जरुरत है । इसलिए जरुरी है पूरक आहार: छह माह तक शिशु का वजन लगभग दो गुना बढ़ जाता है एवं एक वर्ष पूरा होने तक वजन लगभग तीन गुना एवं लम्बाई जन्म से लगभग डेढ़ गुना बढ़ जाती है। जीवन के दो वर्षों में तंत्रिका प्रणाली एवं मस्तिष्क विकास के साथ सभी अंगों में संरचनात्मक एवं कार्यात्मक दृष्टि से बहुत तेजी से विकास होता है। इसके लिए अतिरिक्त पोषक आहार की जरूरत होती है। इसलिए 6 माह के बाद शिशुओं के लिए स्तनपान के साथ अनुपूरक आहार देना चाहिए। ऐसे दें बच्चों को पूरक आहार: 6 माह से 8 माह के बच्चों के लिए नरम दाल, दलिया, दाल -चावल, दाल में रोटी मसलकर ,अर्ध ठोस , साग एवं फल प्रतिदिन दो बार 2 से 3 भरे हुए चम्मच से देना चाहिए। ऐसे ही 9 माह से 11 माह तक के बच्चों को प्रतिदिन 3 से 4 बार एवं 12 माह से 2 वर्ष की अवधि में घर पर पका पूरा खाना , धुले एवं कटे फल को प्रतिदिन भोजन एवं नास्ते में देना चाहिए।
