चितरंजन कुमार:- आजादी के 72 वर्ष बीत जाने के बाद भी देव प्रखण्ड का छुछिया एक ऐसा गांव जहां आज भी गरीबी चरम सीमा पर है।जहां एक ओर सरकार डिजिटल वर्चुअल जैसे बड़े बड़े खेल आधुनिक युग बाता कर खेल रही है।उसके विपरीत या यूं कहें तो ऐसी सरकार और नेताओं को जवाब देने के लिए यह गांव उदाहरण स्वरूप है।बच्चों के बदन पर कपड़े नहीं है पेअर में चप्पल नही है और अधिकांश लोग के घर नही है खाने के लिए दाने नही इलाज के लिए पैसे नही उनके सरकार कल्याणकारी योजना से यह गांव पूरी तरह वंचित है,एक भी घर में गैस चूल्हा नही है।लॉकडाउन में तो समस्या विकट आ चुकी है।लेकिन वह कितने दिन तक चलने वाली है। लॉकडाउन में हर प्रकार के काम बाधित होने से इस गांव के लोगों में भुखमरी की समस्या तो है ही पहनने के लिए कपड़ा भी नहीं बचा है।अब दुलारे पंचायत के पैक्स अध्यक्ष सह जाप नेता विजेंद्र कुमार यादव ने चिंता जाहिर करते हुए कहा है कि आज कहे तो यह गांव कुपोषण का शिकार है।इस गांव के लोग वक्त के भोजन के लिए लोग दर-दर को भटकने को मजबूर हैं।स्थानीय जनप्रतिनिधि केवल इनके वोट से जीत तो जाते हैं लेकिन जीतने के बाद किए गए वादे तो दूर उन्हें देखने तक नहीं आते। बिहार में 15 वर्ष लालू यादव की सरकार रही 15 वर्ष से नीतीश कुमार और सुशील मोदी ने सरकार चला रहें हैं।लेकिन गरीबी की गरीबी दूर करने के लिए ऐसी कोई व्यवस्था नहीं की गई जिससे गरीबी दूर हो सके।
