बिहार से सुधीर मिश्रा जी मोबाइल वाणी के माध्यम से महिला हिंसा पर कहते है की अगर महिलाओं के साथ कोई हिंसा होती है जैसे की छेड़-छाड़ या गलत निगाह से देखे जाने पर महिलाओं द्वारा सामने से उसका विरोध नहीं किया जाता है।लोग सोचते है की इसके खिलाफ आवाज उठाने की हमें क्या जरुरत है।अगर किसी से पूछा भी जाता है की आपके साथ या किसी और के साथ कुछ इस तरह की घटना घटित हुई है तो सामने वाला सही से जवाब नहीं देता है। बिहार में दबंग और पैसे वाले लोगो द्वारा अक्सर ऐसी हरकतें की जाती है।कुछ लोग ऐसे भी होते है जो गलत करने वाले लोगो का ही साथ देते है।महिला हिंसा के सम्बन्ध में बिहार का बदलाव जल्द नहीं होगा।अगर पुलिसकर्मी सही कदम उठाती है तो बिहार में बदलाव होगा।अगर कोई फरियादी पुलिस के पास जाता भी है ,तो पुलिस जिसकी लाठी उसी की भैस कहावत को चरितार्थ करते हुए उसी का साथ देते है जो रिश्वत देते है।ठीक इसके विपरीत जिसकी कोई गलती नहीं है उसकी बात भी नहीं सुनते।महिलाओ के साथ हो रही हिंसा को रोकने के लिए प्रशासन को सख्त होना पड़ेगा इसके साथ ही ग्राम कचहरी में कंप्यूटर और सीसीटीवी कैमरा होना भी जरुरी है।