ज्योति कुमारी जमुई सिकंदर से मोबाइल वाणी के माध्यम से बतातीं है कि अधिकतर शहरी छेत्र के स्ट्रेट लाइट है वे दिन के उजाले में दिन भर जलते रहते है। अधिकतर लाइट में ऑन-ऑफ के स्विच लगे हुए होते है लेकिन लोग अपने काम में इनते मशगूल होते है कि उन्हें लाइट को बंद करने की फुर्सत ही नहीं मिलती। यदि दिन में लाइट को बंद कर दिया जाये तो कुछ हद तक बिजली की बचत हो सकती है। वैसे भी सरकर बाहर से करोड़ो रूपए खर्च कर के बिजली खरीद कर हमे देती है तो जनता का भी यह कर्तव्य होना चाहिए कि वो इसे बर्बाद ना करे। ऐसा नहीं है कि यह समस्या केवल इसी छेत्र में है यह स्थिति बिहार के अन्य इलाकों में भी है। बिजली की कमी के लिए हम शिकायत करते है ,लेकिन जो बिजली बिल हमें मिलता है हम उसका इतना दुरूपयोग करते है कि बिजली का संकट उत्पन्न हो जाता है इसलिए इनकी बचत करना भी हमें सीखना चाहिए।
