ज्योति कुमारी जी सिकंदरा जमुई से बताती है कि भारत में बाल श्रम के कारन अनचाहे रूप से लाखों बच्चों का बचपन तबाह हो रहा है। इसके खात्मे की दिशा में सभी स्तरों पर ईक्षा शक्ति का प्रभाव दिखता है ,इसका नतीजा यह है कि आज देश में 14 वर्ष से कम उम्र के लाखों बच्चे अवैध रूप से प्रतिबंधित स्थानों पर काम कर रहे है। भारतीय समाज में देश के भविष्य में देखे जाने वाले बच्चे के शोषण की यह स्तिथि संविधान के अनुसार 24 वर्ष के अंतर्गत बाल श्रमिक उन्मोलन और 30 के तहत निजी शिक्षा के अधिकार कानून को मुँह चिढ़ा रही है। गौरतलब है की बाल श्रम को बढ़ावा देने में सरकारी नीतियों की स्थिरता का जितना दोष है उतना ही दोष भारतीय समाज में बरसों से व्यप्त गरीबी ,बेरोजगारी व शिक्षा जैसी समस्याओं का रहा है। यदि सरकार बाल श्रम को प्रोत्साहन देने ,इस कारणों से मुक्ति के प्रयास करती है तो बाल श्रम पर बहुत हद तक लगाम लगाया जा सकता है
