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जलवायु की पुकार
मध्यप्रदेश राज्य के शिवपुरी जिला से दिव्या भागवानी मोबाइल वाणी के माध्यम से चल रहे जलवायु की पुकार को लेकर अनुराग पटेरिया से साक्षात्कार किया। जिसमे अनुराग पटेरिया ने बताया कि जलवायु के परिवर्तन से अपने स्वास्थ्य और वातावरण में इसका बहुत ही बुरा प्रभाव पड़ता है। इसका कारन यह है कि अपने आस पास के वातावरण को गन्दगी रखना, पेड़ पौंधों को काटना, ज्यादातर प्लास्टिकों का इस्तेमाल करना, बिजली का खपत करना और बिना सोचे समझे पानी को बर्बाद करना। यह हमारे जलवायु परिवर्तन में पूरा बदलाव आने लगता है, तो इसलिए हमें अपने आस पास पेड़ पौंधों को लगाना चाहिए। प्लास्टिकों का कम से कम इस्तेमाल करना चाहिए। जिससे की आने वाले समय में लोग बीमार न पड़ सके
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परम्परा "तेरे घर में भी तेरी माँ और दादी मर्दों से पहले खाना खा लेती हैं क्या"?- कुछ दिन पहले ब्याह कर आयी निशा पर कामिनी जी गुर्राई। एकदम से सकपका गयी निशा......भरवां भिंडी बचपन से ही बहुत भाती थी....सब्जी सास ने बनाई थी.....रोटियां निशा सेक रही थी......जैसे ही सारी रोटियां सिकीं खुद को रोक न सकी और रोटी का रोल बनाकर जैसे ही मुँह खोला... सास की बात ने कान में गर्म लावा सा उड़ेल दिया। चेहरा उतर गया था बिल्कुल। तभी ससुर जी की आवाज़ आयी..... ये कौन सी परम्परा है कि मर्दों से पहले घर की बहू नहीं खा सकती....10 दिन पहले ही तो वादा किया था समधन जी से तुमने...बेटी बनाकर रखेंगे...क्या हुआ उसका...इतनी जल्दी भूल गयीं? अपनी बेटी नेहा पर भी तुम ऐसे ही चिल्लातीं। तू खा लिया कर बेटा जब भी तेरा कुछ भी खाने का मन करे.......बेटी कहा है तो बेटी मानूंगा भी- भानुप्रताप जी निशा के सिर पर हाथ रखकर बोले। कामिनी जी शर्मिंदा सी वहीं खड़ी रहीं। स्वरचित व मौलिक अनु अग्रवाल।
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जामुन एक ऐसा वृक्ष जिसके अंग अंग में औषधि है। अगर जामुन की मोटी लकड़ी का टुकडा पानी की टंकी में रख दे तो टंकी में शैवाल, हरी काई नहीं जमेगी और पानी सड़ेगा भी नहीं। जामुन की इस खुबी के कारण इसका इस्तेमाल नाव बनाने में बड़ा पैमाने पर होता है। पहले के जमाने में गांवो में जब कुंए की खुदाई होती तो उसके तलहटी में जामून की लकड़ी का इस्तेमाल किया जाता है जिसे जमोट कहते है। दिल्ली की निजामुद्दीन बावड़ी का हाल ही में हुए जीर्णोद्धार से ज्ञात हुआ 700 सालों के बाद भी गाद या अन्य अवरोधों की वजह से यहाँ जल के स्तोत्र बंद नहीं हुए हैं। भारतीय पुरातत्व विभाग के प्रमुख के.एन. श्रीवास्तव के अनुसार इस बावड़ी की अनोखी बात यह है कि आज भी यहाँ लकड़ी की वो तख्ती साबुत है जिसके ऊपर यह बावड़ी बनी थी। श्रीवास्तव जी के अनुसार उत्तर भारत के अधिकतर कुँओं व बावड़ियों की तली में जामुन की लकड़ी का इस्तेमाल आधार के रूप में किया जाता था। स्वास्थ्य की दृष्टि से विटामिन सी और आयरन से भरपूर जामुन शरीर में न केवल हीमोग्लोबिन की मात्रा को बढ़ाता। पेट दर्द, डायबिटीज, गठिया, पेचिस, पाचन संबंधी कई अन्य समस्याओं को ठीक करने में अत्यंत उपयोगी है। एक रिसर्च के मुताबिक, जामुन के पत्तियों में एंटी डायबिटिक गुण पाए जाते हैं, जो रक्त शुगर को नियंत्रित करने करती है। ऐसे में जामुन की पत्तियों से तैयार चाय का सेवन करने से डायबिटीज के मरीजों को काफी लाभ मिलेगा। सबसे पहले आप एक कप पानी लें। अब इस पानी को तपेली में डालकर अच्छे से उबाल लें। इसके बाद इसमें जामुन की कुछ पत्तियों को धो कर डाल दें। अगर आपके पास जामुन की पत्तियों का पाउडर है, तो आप इस पाउडर को 1 चम्मच पानी में डालकर उबाल सकते हैं। जब पानी अच्छे से उबल जाए, तो इसे कप में छान लें। अब इसमें आप शहद या फिर नींबू के रस की कुछ बूंदे मिक्स करके पी सकते हैं। जामुन की पत्तियों में एंटी बैक्टीरियल गुण होते हैं. इसका सेवन मसूड़ों से निकलने वाले खून को रोकने में और संक्रमण को फैलने से रोकता है। जामुन की पत्तियों को सुखाकर टूथ पाउडर के रूप में प्रयोग कर सकते हैं. इसमें एस्ट्रिंजेंट गुण होते हैं जो मुंह के छालों को ठीक करने में मदद करते हैं। मुंह के छालों में जामुन की छाल के काढ़ा का इस्तेमाल करने से फायदा मिलता है। जामुन में मौजूद आयरन खून को शुद्ध करने में मदद करता है। जामुन की लकड़ी न केवल एक अच्छी दातुन है अपितु पानी चखने वाले (जलसूंघा) भी पानी सूंघने के लिए जामुन की लकड़ी का इस्तेमाल करते।
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