समय निर्धारीय हो चुका है
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स्कूल के इंटरवेल में टिफिन खुलते ही आम के अचार की महक से क्लास भर जाती थी, जो बच्चा टिफिन में सब्जी लाया होता था वह भी अचार के लिए मचल उठता था… हमारे समय में स्कूल के टिफिन का मेन्यू आम या मिर्च का अचार के साथ परांठे हुआ करते थे, आम के अचार को तृप्ति के अंतिम छोर तक चूस-चूस कर खाने वाले बच्चे हमारे जमाने में ही मिलते थे। एक ही मेन्यू लगभग रोज रिपीट होता… लेकिन जो संतुष्टि और आनंद उन परांठों और अचार में मिलता, यकीन मानिए दस पकवानों में भी वह आनंद नहीं था, इस अचार और परांठे को खाकर भी हम स्वस्थ और तंदुरुस्त रहते, डॉक्टर्स के यहाँ तो कभी साल दो साल में गए हो तो गए हो वरना हम सब मस्त कलंद अब तो स्कूल के टिफिन में अचार ले जाना ही मना हैं, स्कूल की तरफ से डाइट चार्ट जैसे सेट है और मम्मियों की हर रात यही सोचने में सेट है कि सुबह टिफिन के लिए क्या स्पेशल बनाए
मध्य प्रदेश राज्य के शिवपुरी जिला से दिव्या भगवानी ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि मेरी भी आवाज़ सुनों कार्यक्रम के तहत महिलाओं के भूमि अधिकार में जानकारी दिया गया। यह सुन कर उन्हें बहुत अच्छा लगा
कार्यक्रम गांव आजीविका और हम से मिली खेती की बहुत सी जानकारियां
मध्यप्रदेश राज्य के जिला शिवपुरी से दिव्या भागवानी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि वह जलवायु परिवर्तन से बचने के लिए उपाय अपनाती है। वह जब कही बाहर जाती है तो साथ में बीज लेकर जाती है जहां मिट्टी दिखती है वहां फेंक देती है
