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प्लान इंडिया,चेतना विकास,नव भारत जाग्रति केंद्र,यूनिसेफ,scpcr और मोबाइल वाणी के साझा प्रयास से बाल विवाह मुक्त झारखण्ड अभियान की बारहवीं और अंतिम कड़ी में आइये हम सुनते हैं बाल विवाह से जुडी कहानी "बबली का सफर" दोस्तों पिछली कड़ी में हमसे सुना था कि कैसे बबली के माता -पिता ने बबली को स्कूल भेजना शुरू किया।दोस्तों बारहवीं कड़ी में हम सुनेंगे "17 वर्षीय पिंकी प्रमाणिक की सफलता की सच्ची कहानी" जिसमे पिंकी ने बताया, कि 2016 में दसवीं कक्षा पास करने के बाद इनके माता-पिता इन्हे आगे की पढ़ाई करने को मना कर दिए। और पिंकी की शादी कराने के लिए लड़का देखना शुरू कर दिए क्योंकि पढ़ाई कराने के लिए पिंकी के घरवालों के पास पैसा नहीं था। कुछ दिनों के बाद पिंकी अपने गांव की सेविका दीदी से मिली और अपनी आपबीती बताई। सेविका दीदी पिंकी को संभव टीम की ट्रैनिंग में आने को कहा और वंहा की दीदियों से मिलाया। सीडीपीओं दीदी के द्वारा पत्र लिखकर शिक्षा विभाग को सौंपा गया और पिंकी की पढ़ाई को पूरा कराने को कहा गया। आज पिंकी कस्तुरवा विधालय में नामांकन करा कर अपनी पढाई पूरी कर रही हैं। साथियों यदि आपके आस-पास भी पिंकी प्रमाणिक की तरह कोई घटना घटित हुई है, तो अपने विचारों के साथ-साथ अपना अनुभव मोबाइल वाणी के साथ जरूर साझा करें।

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