सुनील सोरेन,जिला धनबाद से मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि शिक्षा विभाग द्वारा वर्ष 2007-2008 में सरकारी प्रशासनिक विद्यालयों में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को निःशुल्क संथाली भाषा और ओलचिकी लिपि की पुस्तक दी गई थी।उस वितरण के बाद अब तक विद्यालयों में कोई पुस्तक का वितरण नहीं किया गया है जो क्षेत्रीय भाषा और जनजातीय भाषा के साथ भेद भाव को दर्शाता है।इसलिए इनका कहना है की पुस्तक का वितरण करने की पहल की जाये।
