झारखण्ड राज्य के जिला बोकारो से जे.एम रंगीला जी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि झारखंड में भरपूर मात्रा में खनिज संपंदा होते हुए भी यहाँ के लोगों को काम के लिए दूसरे राज्यों में पलायन करना पड़ता है।इसी सिलसिले में मोबाइल वाणी के रिपोर्टर जे.एम रंगीला ने बोकारो जिले के चंद्रपुरा प्रखंड के बंदियों पंचायत के कोरकोट्टा ग्राम निवासी राजेश महतो जी से बातचीत कि बातचीत के दौरान राजेश जी ने बताया कि घर की आर्थिक परिस्थियों को देखते हुए काम की तलाश में इन्हे अपने राज्य से पलायन करना पड़ा। क्योंकि झारखण्ड राज्य में रोजगार के साधन नहीं है।ये तक़रीबन चार से पांच विभिन्न राज्यों में काम किये है।प्रवासी मजदूर होने के नाते इन्हे दूसरे राज्य के लोग त्रिस्कार भरी निगाह से देखते है और कहते है कि तुम्हारे राज्य में इतनी खनिज संपंदा होते हुए भी काम नहीं है।जबकि कुछ लोग मित्र भी बन जाते है।प्रवासी मजदूरों को न तो केंद्र सरकार की ओर से लाभ मिलता है और ना ही राज्य सरकार से।काम और ज्यादा पैसे का लालच देकर ठेकेदार मजदूरों को काम के लिए ले तो जाते है पर उन्हें मजदूरी बहुत ही कम मिलती है। इसके लिए ना तो राज्य सरकार कोई सहायता करती है और ना ही केंद्र सरकार ही कुछ करती है।अक्सर प्रवासी मजदूरों की मजदूरी हड़प कर ली जाती है ठेकेदार द्वारा ,राजेश जी कहते है कि झारखण्ड राज्य को बने हुए कई वर्ष बीत गए है पर रोजगार के अवसर नहीं के बराबर है।और इसका मुख्य कारण यहाँ के नेतागण है।नेता सोचते ही नहीं की झारखण्ड की दशा सुधरे।जिस उद्देश्य के साथ झारखण्ड राज्य को अलग किया गया वह उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है। राजनेता सिर्फ अपना सोच रहे ,अपनी कुर्सी बचाने के लिए ,अपनी सत्ता के लिए और अपनी सम्पति बढ़ाने के लिए कार्य कर रहे है।आम जनता के लिए कोई कुछ नहीं कर रहा है। प्रवासी मजदूरों के लिए अखिल भारतीय स्तर और राज्य स्तर पर कानून बनाये जाने की जरुरत है। जिससे मजदूरों में पनप रहे सुरक्षा की भावना को कम किया जा सके।