विद्यापतिनगर विद्यापति राजकीय महोत्सव के दूसरे दिन सोमवार को भव्य कवि सम्मेलन आयोजित किया गया । कवि सम्मेलन का उद्घाटन एसडीओ प्रियंका कुमारी ने दीप प्रज्वलित कर किया। अध्यक्षता गणेश गिरि कवि ने की । संचालन कवि विनोद कुमार समीर ने किया। कवि सम्मेलन को सम्बोधित करते हुये एसडीओ ने कहा कि मैथिल कोकिल कवि विद्यापति ने अपने पद के माध्यम से लौलीक क्रियाओं का वर्णन किया है। देश में सम्भवतः विद्यापतिधाम एक ऐसा स्थल है जहां भक्त व भगवान की एक साथ पूजा अर्चना की जाती है। कवि सम्मेलन मे कवि सम्मेलन के दरम्यान छात्र कवि मिन्टू कुमार झा कि कविता रब को भी ऊपर देखों अपने भीतर डर देखों,मंदिर में है बैठा रब,मत उसको पत्थर देखों की प्रस्तुति का उपस्थित जनसमूह ने तालियों से इस्तकबाल किया। ख्यातिलब्ध साहित्यकार व कवि डा.सुधीर प्रसाद सिंह सुधीर व प्रो. हरिनारायण सिंह हरि ने अपनी स्वरचित रचना के माध्यम से विद्यापतिधाम की महिमा का बखान किया। ख्यातिलब्ध साहित्यकार व कवि प्रो. सत्यसंघ भारद्वाज ने अपनी रचना भरत भूमि के मार्तंड को दीप जलाने आया हूं के माध्यम से देशभक्ति के परिदृश्य का विवेचन किया। दर्जनों कवि व साहित्यकारों को जिलाधिकारी योगेन्द्र सिंह ने सम्मानित किया गया। मौके पर उन्होंने साहित्यकारों व रचनाकारों से अच्छी- अच्छी रचनाओं का सृजन करने की अपील की।विस्तृत जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें।