फोटो-श्री कृष्ण रुकमणी विवाह के प्रसंग का श्रवण करते हुए भक्तगण प्रतिनिधि-मोहिउद्दीन नगर समस्तीपुर जिला के पटोरी प्रखंड अंतर्गत रुपौली पंचायत के शरहद माधो गांव के निर्माणाधीन फोरलेन के निकट चल रहे दिव्या भव्य विशाल श्री श्री 108 श्री 21 कुण्डात्मक महायज्ञ के छठे वृंदावन धाम से पधारे पूज्या दिव्या देवी के मुखारविंद से श्रीकृष्ण-रुक्मणी विवाह का प्रसंग श्रवण करया गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार समस्तीपुर जिले के शरहद माधव गांव में चल रहे गोमेष्ट महायज्ञ में प्रसंग का रसपान कराते हुए कहा कि विदर्भ के राजा भीष्मक के घर रुक्मिणी का जन्म हुआ। बाल अवस्था से भगवान श्रीकृष्ण को सच्चे हृदय से पति के रूप में चाहती थीं। लेकिन भाई रुक्मिणी का विवाह शिशुपाल के साथ कराना चाहता था। रुक्मिणी ने अपने भाई की इच्छा जानी तो उसे बड़ा दुख हुआ। अत: शुद्धमति के अंतपुर में एक सुदेव नामक ब्राह्मण आता-जाता था। रुक्मिणी ने उस ब्राह्मण से कहा कि वे श्रीकृष्ण से विवाह करना चाहती हैं। सात श्लोकों में लिखा हुआ मेरा पत्र तुम श्रीकृष्ण तक पहुंचा देना। पत्र के माध्यम से रुक्मिणी ने कहा कि मुझे विश्वास है कि आप इस दासी को स्वीकार नहीं करेंगे तो मैं हजारों जन्म लेती रहूंगी। मैं किसी और पुरुष से विवाह नहीं करना चाहती हूं। कथावाचक ने बताया कि पार्वती के पूजन के लिए जब रुक्मिणी आई, उसी समय प्रभु श्रीकृष्ण रुक्मिणी का हरण कर ले गए। अत: रुक्मिणी के पिता ने रीति रिवाज के साथ दोनों का विवाह कर दिया। इंद्र लोक से सभी देवताओं द्वारा पुष्पों की वर्षा की तथा खुशियां लुटाई।इसके बाद सुदामा चरित्र का वर्णन किया गया। इस मौके पर उपस्थित सतेंद्र महतो ,राम प्रवेश , भूषण, राजीव, लड्डू लाल, जयप्रकाश, प्रमोद, चित्तरंजन, आर्यान्द,सोनू, गरीब नाथ, रवीश,मनीष, राजेश, निशांत, अभिषेख इत्यादि थे।