समस्तीपुर जिला के पटोरी प्रखंड अंतर्गत शरहद माधव गांव में कुंड आत्मक श्री श्री 108 गोमेष्ट महायज्ञ के पंचम दिवस पर वृंदावन धाम से पधारे कथावाचक दिव्या देवी ने गोवर्धन लीला के साथ भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का प्रसंग श्रवण करते हुए कहा कि श्री कृष्ण भगवान के द्वारा अपने बाल शखाओं के साथ गायों को चराने गांव की गोपीकाओ के घरों में घुसकर दूध दही एवं माखन खाने तथा माखन से भरी हुई मटकियों को फोड़ने सहित अन्य बाल लीलाओं की कथा सुनाई जिन्हें सुनकर श्रोता श्री कृष्ण भगवान की बाल लीलाओं को सुनकर ताली बजाते हुए हंसने लगे। उन्होंने यह भी कहीं की भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी लीलाओं से जहां कंस के भेजे विभिन्न राक्षसों का संहार किया, वहीं ब्रज के लोगों को आनंद प्रदान किया। कथा के दौरान भगवान गिरिराज पर्वत को उठाते हुए सुंदर झांकी सजाई गई। इस दौरान भजनों पर श्रद्धालु देर तक नाचते रहे। प्रसंग में बताया गया कि इंद्र को अपनी सत्ता और शक्ति पर घमंड हो गया था। उसका गर्व दूर करने के लिए भगवान ने ब्रज मंडल में इंद्र की पूजा बंद कर गोवर्धन की पूजा शुरू करा दी।इससे गुस्साए इंद्र ने ब्रज मंडल पर भारी बरसात कराई। प्रलय से लोगों को बचाने के लिए भगवान ने कनिष्ठा उंगली पर गोवर्धन पर्वत को उठा लिया। सात दिनों के बाद इंद्र को अपनी भूल का एहसास हुआ। इस मौके पर सीतल दास,सुदिन कुमार, किशनदेव शर्मा, राहुल कुमार, शिवनाथ कुमार,अमरजीत कुमार, विजय शंकर, चन्दन कुमार, अमरनाथ पाल, रंजन कुमार, धर्मेंद्र महतो, उदय राउत, इंद्रदेव महतो, रमेश कुमार,अंजय कुमार, मनोज महतो,राजीव कुमार,दिलीप महतो,वीरू महतों इत्यादि मौजूद थे।
