माँ से बड़कर कोई नाम क्या होगा इस नाम का हमसे एहतराम क्या होगा जिसके पैरों के नीचे जन्नत है उसके सर का मक़ाम क्या होगा। मां तो जन्नत का फूल है प्यार करना उसका उसूल है, दुनिया की मोह्ब्बत फिजूल है मां की हर दुआ कबूल है, मां को नाराज करना इंसान तेरी भूल है, मां के कदमो की मिट्टी जन्नत की धूल है। इस खबर को सुनने के लिए ऑडियो पर क्लिक करें।
