सुबे में सरकार ने शराब बंदी लागू करते हुए राजकोषीय घाटे को भले ही चरम पर पहुंचा दिया हो, सुबे में महंगाई आसमान छू रही हो लेकिन जिस तरह से शराब माफियाओं के हौसले बुलंद हैं और चोरी-छिपे होम डिलीवरी के माध्यम से लोगों के पास शराब पहुंच रही है उससे शराबबंदी कानून पर प्रश्न चिन्ह लग गया है एक तरफ तो सरकार को अरबों रुपए की राजस्व की क्षति हो रही है और उसकी प्राप्ति के लिए दूसरे रास्तों से टैक्स की उगाही की जाती है और दूसरी तरफ जहरीली शराब पीने से सुबे में हो रही मौतों के मद्देनजर सरकार की छीछालेदारी हो रही है। समस्तीपुर जिला में बीते सप्ताह को जहरीली शराब पीने से मरने वालों के आंकड़े लगभग दर्जन से अधिक हो चुके हैं
