गुजरात में पांच साल के दौरान 40,000 से अधिक महिलाओं के लापता होने के मामले सामने आए हैं. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार, 2016 में 7,105, 2017 में 7,712, 2018 में 9,246 और 2019 में 9,268 महिलाएं लापता हुई हैं.विस्तृत जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें।

Transcript Unavailable.

भारत में लगातार कोविड-19 के सक्रिय मामलों में गिरावट दर्ज की गई है।  सक्रिय मामलों की संख्या 27,212 के आसपास बनी हुई है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक देश में सक्रिय मामलों की संख्या 30,041 थी।विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर। 

Transcript Unavailable.

गांव आजीविका और हम के इस कड़ी में हम हमारे विशेषज्ञ कमल धुर्वे द्वारा जानेंगे लम्पी वायरस से अपने पशु का बचाव कैसे करे। अधिक जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें

बीएड कॉलेजों की गुणवत्ता पर उठते सवालों के बीच चार वर्षीय नए इंटीग्रेटेड बीएड कोर्स को लेकर शिक्षा मंत्रालय बेहद सतर्क है। वह अभी सिर्फ सरकारी शिक्षण संस्थानों को ही इस नए कोर्स को चलाने की अनुमति देने के पक्ष में है।यही वजह है कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद ( एनसीटीई) ने दूसरे चरण के पायलट के लिए भी केंद्रीय व राज्य के विश्वविद्यालय सहित राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों से ही आवेदन मांगे गए है। इस दौरान 31 मई तक इन संस्थानों को आवेदन करने के लिए कहा है। एनसीटीई का मानना है कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप शिक्षकों को तैयार करने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है। ऐसे में जब तक यह कोर्स पूरी तरह से परिपक्व नहीं हो जाता है, तब तक इसे सिर्फ सरकारी और शीर्ष शिक्षण संस्थानों से ही चलाने की अनुमति दी जाएगी।इस कोर्स के पहले चरण के पायलट में देश भर के 57 शीर्ष सरकारी शिक्षण संस्थानों को चयनित किया गया है, जिसमें आइआइटी और एनआइटी जैसे संस्थान भी शामिल है। एनसीटीई के मुताबिक शीर्ष संस्थानों को ही इन कोर्स को चलाने की अनुमति देने से इसकी गुणवत्ता को कायम रखा जा सकेगा। इन सभी संस्थानों में इसी साल से यह कोर्स शुरू हो जाएगा। 15 मई तक इनमें दाखिले के लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया भी शुरू हो सकती है। फिलहाल इनमें दाखिला प्रवेश परीक्षा के जरिए होगा। इस प्रोग्राम के तहत संस्थान बीए-बीएड, बीएससी-बीएड व बीकॉम- बीएड जैसे कोर्स शुरु कर सकेंगे। यह कोर्स भी क्रेडिट सिस्टम के तहत डिजाइन किया गया है।विस्तृत जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें।

उच्च पेंशन का विकल्प चुनने वाले ग्राहकों के मूल वेतन के 1.16 फीसदी के अतिरिक्त योगदान का प्रबंधन कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) द्वारा संचालित सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में नियोक्ताओं के योगदान से किया जाएगा।श्रम मंत्रालय ने कहा कि भविष्य निधि में नियोक्ताओं के कुल 12 फीसदी योगदान में से ही 1.16 फीसदी अतिरिक्त योगदान लेने का फैसला किया गया है। ईपीएफ और एमपी अधिनियम की भावना के साथ-साथ संहिता (सामाजिक सुरक्षा पर संहिता) कर्मचारियों से पेंशन कोष में योगदान की परिकल्पना नहीं करती है। वर्तमान में सरकार कर्मचारी पेंशन योजना  में योगदान के लिए सब्सिडी के रूप में 15,000 रुपये तक के मूल वेतन का 1.16 फीसदी भुगतान करती है।ईपीएफओ द्वारा संचालित सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में नियोक्ता मूल वेतन का 12 फीसदी योगदान करते हैं।नियोक्ताओं के 12 फीसदी के योगदान में से 8.33 फीसदी ईपीएस में जाता है और शेष 3.67 प्रतिशत कर्मचारी भविष्य निधि में जमा किया जाता है।अब वे सभी ईपीएफओ सदस्य जो उच्च पेंशन प्राप्त करने के लिए 15,000 रुपये प्रति माह की सीमा से अधिक अपने वास्तविक मूल वेतन पर योगदान करने का विकल्प चुन रहे हैं, उन्हें ईपीएस के लिए इस अतिरिक्त 1.16 फीसदी का योगदान नहीं करना होगा।श्रम और रोजगार मंत्रालय ने उपरोक्त (निर्णय) को लागू करते हुए 3 मई, 2023 को दो अधिसूचनाएं जारी की हैं।मंत्रालय ने कहा कि अधिसूचना जारी किए जाने के साथ ही सुप्रीम कोर्ट के 4 नवंबर, 2022 के फैसले के सभी निर्देशों का अनुपालन पूरा कर लिया गया है।दरअसल, शीर्ष अदालत ने अधिकारियों को छह महीने की अवधि के भीतर योजना में आवश्यक समायोजन करने का निर्देश दिया था। 2014 में योजना में किए गए संशोधन के अनुसार, कर्मचारियों को 15,000 रुपये प्रति माह से अधिक वेतन पर 1.16 प्रतिशत का अतिरिक्त योगदान करने की आवश्यकता होगी।साथयों,क्या आप वर्तमान पेंशन व्यवस्था से संतुष्ट हैं ? पेंशन में सुधार के लिए आप का क्या सुझाव है ?अपनी बात हम तक पहुंचाने के लिए फोन में अभी दबाएं नम्बर 3.

पंचायत तीसरी नही पहली सरकार है - श्री सुनिल कुमार सचिव भारत सरकार

सोशल मीडिया पर जहाँ कई जरुरी जानकारियां मिलती है वहीं भ्रामक खबरों की भी भरमार रहती है। ऐसा ही एक खबर इन दिनों काफी वायरल हो रहा है। यूट्यूब चैनल के एक वीडियो में दावा किया जा रहा है कि केंद्र की मोदी सरकार जिनके परिवार में बेटियां हैं उन्हें 'कन्या सुमंगला योजना' के तहत हर महीने ₹4,500 रुपये दे रही है। ऐसे में इसका लाभ पाने के लिए आज ही आवेदन करें। यह दावा  सरकारी व्लॉग [Sarkari Vlog ] नामक यूट्यूब चैनल के एक वीडियो में किया गया है।  वायरल इस खबर की सच्चाई जब पीआईबी की तरफ से जांची और परखी गई तो पाया गया कि यह खबर फेक हैं एवं सच्चाई से इस खबर का कोई वास्ता नही है। जिसके बाद पीआईबी ने ट्वीट कर के कहा गया कि सरकार की तरफ से इस तरह की कोई योजना नहीं है। ऐसे में इस तरह की खबरों पर भरोसा ना करें। साथियों अगर आपके पास भी ऐसा कोई भ्रामक ख़बर आता है,तो उसके बारे में जनता को जागरूक करें. अपनी बात रिकॉर्ड करने के लिए फोन में अभी दबाएं नम्बर 3.

वर्ष 2070 तक देश को कार्बन उत्सर्जन से पूरी तरह से मुक्त करने के लक्ष्य को लेकर मुहिम तेज हो गई है। हालांकि यह लक्ष्य इतना आसान नहीं है, लेकिन सरकार ने फिलहाल अपने सभी सरकारी भवनों की छतों को सोलर पैनल  (रुफ टॉप सोलर) से लैस करने को लेकर अभियान छेड़ दिया है।इस दिशा में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने आगे बढ़ते हुए अपने सभी विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों से अपने भवनों की छतों को सोलर पैनल से लैस करने के निर्देश दिए है। आयोग ने सभी विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को लिखे पत्र में कहा है कि इस पहल से बिजली की बचत होगा।साथ ही स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में आगे बढ़ रहे देश को इससे मदद भी मिलेगी। यूजीसी ने सभी उच्च शिक्षण संस्थानों से इस दिशा में योजना तैयार तक तेजी से आगे बढ़ने का सुझाव दिया है। बता दें कि पीएम मोदी ने ग्लास्गो में हुई कॉप-26 में दुनिया को पंचामृत का संदेश दिया था। जिसमें अपने लक्ष्यों की घोषणा की थी।साथ ही कहा था कि 2030 तक भारत ने 500 गीगा वाट नॉन फासिल एनर्जी को पैदा करने का लक्ष्य रखा है। अभी देश में बिजली का बड़े पैमाने पर उत्पादन कोयले से होता है।साथयों,?क्या सोलर पैनल के उपयोग से बिजली की समस्या का समाधान हो पाएगा ? क्या यूजीसी द्वारा विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों के भवनों की छतों को सोलर पैनल से लैस करने का निर्देश सही है ?अपनी बात हम तक पहुंचाने के लिए फोन में अभी दबाएं नंबर 3.