बिहार राज्य के मधुबनी जिला के खजौली प्रखंड से रामाशीष जी ने मोबाईल वाणी के माध्यम से बताया कि शिक्षा विकास की पूँजी है एवं प्राथमिक शिक्षा ही शिक्षा की नींव है।यदि प्राथमिक शिक्षा रूपी नींव ही कमजोर होगी तो शिक्षा रूपी भवन का धराशाई होना निश्चित है।वर्तमान समय में,बिहार राज्य में प्राथमिक शिक्षा की स्थिति बहुत खराब है।इस प्रकार की शिक्षा व्यवस्था से सर्वांगीण विकास संभव नहीं है।संविधान लागू होने के समय शिक्षा को संविधान की सातवीं अनुसूची,सूचि दो में अर्थात राज्य सूचि में सम्मिलित किया गया था। इस सूचि के अनुसार राज्य विधान मंडल को कानून बनाने की शक्ति है।संविधान के बियालीसवाँ संशोधन के अनुसार शिक्षा को सातवीं अनुसूची की सूचि तीन समवर्ती कंक्रीट लिस्ट में शामिल किया गया है। इस सूचि के विषयों पर संसद एवं विधान मंडल को कानून बनाने का अधिकार है।यदि बेपटरी हुई प्राथमिक शिक्षा को सरकार पटरी पर लाना चाहती है तो प्राथमिक शिक्षा को सातवीं अनुसूची,सूचि एक सेन्ट्रल लिस्ट में शामिल करने के लिए संसद को संविधान में संशोधन करने की आवश्यकता है।
