बिहार राज्य के मधुबनी जिले से संवाददाता रामाशीष सिंह मोबाइल वाणी के माध्यम से शिक्षा की महत्ता के विषय में बताते हैं की शिक्षा से ही मनुष्य जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है।पशुता से मनुष्यता,असभ्य से सभ्य तथा असंस्कृत से सुसंस्कृत करने वाले मूल तत्व को ही शिक्षा कहते हैं।इस मौलिक अवयव के बिना मनुष्य जीवन अपरिभाषित,अधूरा एवं निरर्थक है।मनुष्य जीवन को सार्थक,सफल तथा उत्कृष्ट बनाने के लिए शिक्षा रुपी अमृत की घूंट अमूल्य है।कहा गया है की शिक्षा से ही मनुष्य अमरत्व को प्राप्त कर सकता है तथा विद्या ही सर्व दृष्टि प्रदान करती है,वह दृष्टि जिसके अनुरूप यह विचार उत्पन्न होता है की विकसित मनुष्य ही परम एवं शास्वत,सुबुद्धित एवं सुसंस्कृत है।अतः इस सुसंस्कृत मष्तिष्क को सुसज्जित करने वाले मूल तत्व शिक्षा की पहचान सर्वविदित है।इस प्रकार शिक्षक का अस्तित्व भी सर्वत्र अविवादित है और इस अविवादित पहचान को सदा मर्यादित एवं प्रशिक्षित रखने का दायित्व भी शिक्षकों पर है।
