मधुबनी जिले के खजौली प्रखंड से रामाशीष सिंह जी मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे है कि हिन्दू धर्म के सौलह संस्कारो में विवाह एक पवित्र संस्कार है। संस्कार का नियम है कि जब वर-वधु विवाह मंडप में आते है तो पुरोहित ईश्वर को साक्षी मानकर वर-वधु को विवाह संपन्न कराते है। लेकिन विवाह तब तक संपन्न नही होता जब तक वर-वधु अग्नि के सामने सात फ़ेरे लगाकर सात वचन निभाने का वादा पूरा ना कर ले। विवाह के समय अग्नि के चारो ओर फ़ेरे इसलिए लगाए जाते है क्योंकि अग्नि को विश्व के समान माना गया है, शास्त्रो में कहा गया है कि अग्नि में सभी देवी-देवताओ की आत्मा का वास है, इसलिए अग्नि में हवन करने से हवन में दिए सभी चीजे देवताओ तक पहुँच जाती है। विवाह के समय अग्नि के चारो ओर फ़ेरे लेकर सात वचन लेने से ये माना जाता है कि सभी देवताओ को साक्षी मानकर एक दूसरे को अपना जीवन-साथी स्वीकार किया गया तथा अपनी अशुद्धि को दूरकर शुद्ध मन से अपने जीवन-साथी को अपनाना।
