रामानंद जी मधुबनी खुटौना से मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते है कि सरकार के लाख प्रयासों के बावजूद गुणवत्तापूर्वक शिक्षा दुर्लभ वस्तु बनती जा रही है। सरकार की पोशाक ,छात्रव्रिति ,मिड -डे मील ,साईकिल योजनाओं जैसी लुभानी वाली योजना भी शिक्षा के लिए निजी विद्यालयों की ओर बढ़ती झुकाव को नहीं रोक पा रही है ,इसका क्या कारण है ?क्योंकि सरकारी विद्यालयों में छात्र -शिक्षिकाओं अनुपात सही नहीं है एवम शिक्षकों का अभाव है। सरकारी शिक्षक अपनी जवाबदेही से भागते है। वेतन काम के कारन उनमे विद्यापन के प्रति उत्त्साह में कमी है ,अतः सरकारी विद्यालयों में पढ़ाई-लिखाई चौपट है ,दूसरी और निजी विद्यालयों में नियंत्रक विद्यालय संचालक के पास रहता है जो शिक्षक की नियुक्ति करते है तथा नियन्तण रखते है साथ ही अध्यापन की निगरानी भी करते है। जिसमे उनको बताया जाता है कि अच्छी शिक्षा नहीं देने पर छात्रों की संख्या घटेगी जिसका असर विद्यालय के आमदनी पर पड़ेगा ,इसलिए कड़ी मेहनत ,निगरानी और अनुशासन पर ध्यान देना चाहिए।