मधुबनी मोबाइल वाणी के माध्यम से खजौली से रामाशीष सिंह जी कहते है कि स्वच्छता के आभाव के कारण लोगो को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है, इसके लिए बच्चो को जागरूक करने की जरूरत है लेकिन जागरूक करेगा कौन? विद्यालयों में छात्र-छात्राओ को स्वच्छता के बारे में समझाना शिक्षक का काम है,लेकिन शिक्षक ही स्वच्छता के महत्व से उदासीन है। विद्यालयों में भर्मण के पश्चात यह बात सामने आई है कि हर जगह गंदगी की अम्बार है,शौचालय से बदबू,चापाकल के सामने पानी का जमाव एवं कीड़े-मकौड़े राज है।सरकारी विद्यालयों में बच्चे गंदे लिवाज में आते है , इस ओर ध्यान नही दिया जाता है। विद्यालय शिक्षा समिति की भाँति, निगरानी समिति भी सिर्फ कागज पर ही शोभा बढ़ा रही है। जब शिक्षक ही स्वच्छता अभियान को महत्व नही दे रहे है तो स्वच्छता की सुखद स्थिति कल्पना करना मुश्किल है।
