सुनिए एक प्यारी सी कहानी। इन कहानियों की मदद से आप अपने बच्चों की बोलने, सीखने और जानने की समझ बढ़ा सकते है।ये कहानी आपको कैसी लगी? क्या आपके बच्चे ने ये कहानी सुनी? इस कहानी से उसने कुछ सीखा? अगर आपके पास भी कोई मज़ेदार कहानी है, तो रिकॉर्ड करें, फ़ोन में नंबर 3 का बटन दबाकर।
जन्म से आठ साल की उम्र तक का समय बच्चों के विकास के लिए बहुत खास है। माता-पिता के रूप में जहाँ हम परवरिश की खूबियाँ सीखते हैं, वहीँ इन खूबियों का इस्तेमाल करके हम अपने बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को बढ़ावा दे सकते है।आप अपने बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास को बढ़ाने और उन्हें सीखाने के लिए क्या-क्या तरीके अपनाते है? इस बारे में बचपन मनाओ सुन रहे दूसरे साथियों को भी जानकारी दें। अपनी बात रिकॉर्ड करने के लिए दबाएं नंबर 3.
"गांव आजीविका और हम" कार्यक्रम के तहत हमारे कृषि विशेषज्ञ कपिल देव शर्मा आम के बगीचे की रखरखाव की जानकारी दे रहे हैं । अधिक जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें
प्रेस विज्ञप्ति शाहजहांपुर/दिनांक 12.02.2024/ जिलाधिकारी श्री उमेश प्रताप सिंह ने सोमवार को उप कृषि निदेशक कार्यालय का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने विभिन्न पटालों पर जा कर योजनाओं की प्रगति की जानकारी ली तथा उससे सम्बन्धित रजिस्टरों को देखा। कार्यालय में साफ-सफाई ठीक ना पाये जाने पर जिलाधिकारी ने सफाई कर्मी की कड़ी फटकार लगाई। निरीक्षण के दौरान कार्यालय के सभी पटलों पर कर्मचारी उपस्थित मिलें। योजनाओं से सम्बन्धित पत्रावलियों का रख-रखाव भी ठीक पाया गया। कार्यालय में सफाई व्यवस्था ठीक न पाये जाने पर जिलाधिकारी ने सफाई कर्मी की कड़ी फटकार लगाते हुये प्रतिदिन सही ढंग से सफाई करने हेतु निर्देशित किया। जिलाधिकारी ने उप कृषि निदेशक श्री धिरेन्द्र कुमार सिंह को निर्देश दिये कि सम्बन्धित योजनाओं का फ्लेकस कार्यालय के बहार प्रदर्शित किया जाये जिससे कि आने वाले लोगो कृषि सम्बन्धित योजनाओं की जानकारी मिल सके। उन्होने निर्देश दिये कि कृषि सम्बन्धित योजनाओं को लाभ पात्रों को मिले यह सुनिश्चित किया जाये। --------------- जिला सूचना कार्यालय शाहजहांपुर द्वारा प्रसारित।
सरकार को भारत रत्न देने के अलावा किसानों को उनके अधिकार भी देने चाहिए , आखिर उनकी मांग भी तो बहुत छोटी सी है कि उन्हें उनकी फसलों का बेहतर मूल्य मिले। हालांकि किसानों की इस मांग का आधार भी एम एस स्वामीनाथन समिति की सिफारिशें हैं जो उन्होंने आज से करीब चार दशक पहले दी थीं। इन चार दशकों में न जाने स्वामीनाथन समिति की सिफारिशों को लागू करने का वादा करके न जाने कितनी सरकारें आईं और गईं, इनमें वर्तमान सरकार भी है जिसने 2014 के चुनाव में इन सिफारिशों को लागू करने का वादा प्रमुखता से किया था। -------दोस्तों आप इस मसले पर क्या सोचते हैं, क्या आपको भी लगता है कि किसानों की मांगो को पूरा करने की बजाए भारत रत्न देकर किसानों को उनके अधिकार दिलाए जा सकते हैं? --------या फिर यह भी किसानों को उनके अधिकारों को वंचित कर उनके वोट हासिल करने का प्रयास है.
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