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फैजाबाद, शान ए अवध का ऐसा नमूना जो लखनऊ से पहले बनाया गया है, खूबसूरत इतना की एक झलक में नजर ठहर जाए, घंटाघर पर बनी मस्जिद या फिर उसके सामने बना लॉयड दरवाजा फैजाबाद के प्रतीक चिन्ह हैं, बेतहाशा भीड़ से भरे बाजार की चिल्लम चिल्ली मैं, चूड़ी बेचता दुकानदार या फिर आलू चाट के लिए आवाज देता ठेलिया वाला। सब कुछ एक से एक उम्मदा बस जरूरत है उस नजर की जो आपको ठहरा दे, रोक दे और कहे की गुरु यही तो चाहिए था। मालूम नहीं की क्या चाहिए था लेकिन बस यही तो एक जगह थी प्रेमिका के लिए चूड़ी, पत्नी के लिए साड़ी, बच्चों के लिए जूते और बाप के लिए कुर्ता पजामा यहां सब कुछ मिलेगा।

चलती नाव पर सेल्फी लेना और क्षमता से अधिक लोगों को स्वर करना प्रतिबंधित किया जाए।