ठंड बढ़ने के साथ कुत्ते, सियार, बिल्ली और बंदर अधिक खूंखार हो गए हैं। इनके काटने से जख्मी मरीजों की संख्या गर्मी के दिनों की अपेक्षा करीब तीन गुना बढ़ गई है। गर्मी के दिनों में जहां औसतन 40 से 50 लोग एआरवी का हे इंजेक्शन लगवाने आते थे, अब यह संख्या बढ़कर 150 से भी अधिक हो गई है। कई दिन तो 120 से अधिक मरीज आए हैं। हालांकि अधिकतर सीएचसी पर एआरवी उपलब्ध है। शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में कुत्ते सड़कों पर और बंदर घरों के अंदर काट कर घायल कर रहे हैं। कुत्तों का प्रजनन माह होने के कारण यह और खतरनाक हो गए हैं। कई मोहल्ले में इनका आतंक पसरा हुआ है।