हमारे पुरुष प्रधान समाज में बच्चे और महिलाएं हिंसा का आसानी से शिकार हो जाते है। ऐसा ही हाल ट्रांसजेंडर यानी तीसरे जेंडर का भी है। ये वो लोग है जो खुद को ना पुरुष और ना ही महिला मानते हैं। इनके हक़ के लिए संघर्षरत है पिया कपूर, जो खुद भी एक किन्नर है। पिया का कहना है कि लोग उन्हें भी इंसान समझे। इसके लिए समाज की सोच और कानून में बदलाव बहुत ज़रूरी है।तीसरे जेंडर के लिए लोगों की सोच और भावनाएं कैसे सुधारी जा सकती है? क्या स्कूली शिक्षा के माध्यम से इस समुदाय के लोगों का जीवन बेहतर हो सकता है? अपने विचार और अनुभव हमें बताने के लिए फोन में अभी दबाएं नम्बर 3

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बीते दिनों महिला आरक्षण का बहुत शोर था, इस शोर के बीच यह भी ध्यान रखा जाना चाहिए की अपने को देश की सबसे बड़ी पार्टी कहने वाले दल के आधे से ज्यादा भू-भाग पर शासन होने के बाद भी एक महिला मुख्यमंत्री नहीं है। इन सभी नामों के बीच ममता बनर्जी इकलौती महिला हैं जो अभी तक राजनीति में जुटी हुई हैं। वसुंधरा के अवसान के साथ ही महिला नेताओं की उस पीढ़ी का भी अवसान हो गया जिसने पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय तक महिलाओं के हक हुकूक की बात को आगे बढ़ाया। यह सब ऐसे समय में हो रहा है जबकि देश में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिये जाने की बात की जा रही है। एक तरफ महिला नेताओं को ठिकाने लगाया जा रहा है, दूसरी तरफ नया नेतृत्व भी पैदा नहीं किया जा रहा है।

हंसने-हंसाने से इंसान खुश रहता है, जिससे मानसिक तनाव, चिंता और डिप्रेशन कम होता है। दोस्तों, उत्तम स्वास्थ्य के लिए हंसी-मज़ाक बहुत ज़रूरी है। इसीलिए मोबाइल वाणी आपके लिए लेकर आया है कुछ मजेदार चुटकुले, जिन्हें सुनकर आप अपनी हंसी रोक नहीं पाएंगे। हो जाइए तैयार, हंसने-हंसाने के लिए... सुनिए हंसी-मज़ाक में डूबे हंसगुल्ले और रिकॉर्ड कीजिए अपने चुटकुले मोबाइल वाणी पर, फोन में नंबर 3 का बटन दबाकर।

यह देश संविधान से चलता है यह एक लाइन जो हम हर दूसरे दिन किसी न किसी के मुंह से सुनते ही रहते हैं संविधान पर इतिहास था के बाद भी देश में संविधानिक मूल्य की भावनाओं का अभाव है संविधान के प्रति पैदा हुए इस अभाव के भाव के लिए वही लोग जिम्मेदार है जो हर एक बात पर रहते हैं कि यह देश संविधान से चलता है। आज हमारे साथ समाजवादी विचारक एवं वरिष्ठ पत्रकार रघुजी ठाकुर सर के साथ मोबाइलवाणी पर विशेष बातचीत कर अपनी प्रतिक्रिया मोबाइलवाणी पर साझा की।

सुनिए जेंडर हिंसा के खिलाफ चल रहे हमारे इस कार्यक्रम बदलाव का आगाज़ में आज यशस्विनी जी ने उन कानूनों के बारे में बताया जो इस मामले में पीड़ित की मदद कर सकते हैं और बताए उन संगठनों की नाम जो जेंडर-आधारित हिंसा के मामलों में लोगों को कानूनी प्रक्रिया में सहायता करते हैं। आपके विचार में, समाज में जेंडर हिंसा के खिलाफ बदलाव के लिए सबसे बड़ी जरूरत क्या है? जेंडर हिंसा के खिलाफ लड़ाई में कानून कितना महत्वपूर्ण है? क्या आपने कभी जेंडर हिंसा के खिलाफ किसी की मदद की है?

मुख्यमंत्री जन सेवा मित्र कर रहे वित्तीय साक्षरता का आकलन ईसागढ़ | मध्य प्रदेश शासन के अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान भोपाल के निर्देश पर मुख्यमंत्री जन सेवा मित्र अपने क्षेत्र में वित्तीय साक्षरता व वित्तीय डिजिटल साक्षरता का आकलन कर रहे हैं विपिन रघुवंशी ने बताया सीएम फैलो आदर्श जैन के मार्गदर्शन में डोर टू डोर नगर गांव में युवा महिला किसान बुजुर्ग से चर्चा कर वित्तीय साक्षरता वित्तीय डिजिटल साक्षरता की जानकारी ली जा रही है ताकि क्षेत्र के वित्तीय साक्षरता का आकलन हो सके उक्त आकलन के आधार पर सरकार वित्तीय साक्षरता बढ़ाने के लिए प्रोग्राम तैयार करेगी रघुवंशी के अनुसार हम आकलन में व्यक्ति के दीर्घकालीन निवेश क्रेडिट स्कोर वित्तीय उत्पाद इलेक्ट्रॉनिक मनी ऑनलाइन वित्तीय सेवाएं साइबर क्राइम मुद्रा स्थिति बैंक किरण डर की जानकारी ले रहे हैं साथ ही आकलन के माध्यम से वित्तीय साक्षरता भी प्रदान की जा रही है

आमतौर पर टीएल बैठक का आयोजन जिला मुख्यालय के कलेक्ट्रेट भवन में किया जाता है। लेकिन कल मंगलवार को यह बैठक उत्तर प्रदेश राजघाट के विआईपी रिसोर्ट में हुई। दरअसल विधानसभा चुनाव में दोनों सीट मुंगावली और चंदेरी और अशोकनगर के चुनाव संपन्न होने और मतगणना के बाद अधिकारियों की चुनाव के बाद पार्टी का आयोजन परंपरा अनुसार कहीं ना कहीं किया जाता है। तो ऐसे में कल का आयोजन राजघाट डैम के नजदीक बने वीआइपी रिसोर्ट में प्रशासन ने किया। इस अवसर बैठक भी हो गई हालांकि गौर करने वाली बात यह है कि प्रशासन बैठक के मुद्दों पर कितनी औपचारिकताएं बताएं हुई होगी यह आसानी से समझा जा सकता है। लेकिन जिस रेस्ट हाउस में यह बैठक संपन्न हुई यह यूपी में स्थित है। इस तरह ऐसे में पहली बार मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले की प्रत्येक सोमवार को होने वाली टीएल बैठक उत्तर प्रदेश प्रांत में हुई।

जेंडर हिंसा के खिलाफ चल रहे हमारे इस कार्यक्रम बदलाव का आगाज़ में आज सुनिए यशस्विनी जी को, जो जेंडर आधारित हिंसा पर कानूनी मामलों की जानकार हैं। यशस्विनी जी का कहना है कि अगर हिंसा है तो उसे करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का कड़ा प्रावधान भी है. बस जरूरत है तो... कदम बढ़ाने की!