गोरखपुर। चन्द्रकान्ति रमावती देवी आर्य महिला पी०जी० कॉलेज गोरखपुर में अनुसन्धान समिति और आन्तरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित "अनुसंधान की प्रविधि विषय पर पाँच दिवसीय कार्यशाला का समापन हुआ। इस अवसर पर "अनुसन्धान प्रतिवेदन पर विशिष्ट व्याख्यान देते हुए डॉ० मुकेश सिंह अस्सिटेंट प्रोफेसर दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर ने कहा कि शोध प्रतिवेदन शोध कार्य को संप्रेषित करने का माध्यम है शोध का विश्लेषण कितना भी अच्छा किया जाए, लेकिन अगर उन्हें ठीक से संप्रेषित नहीं किया जाता है तो उसका वांछित प्रभाव या परिमाण प्राप्त नहीं होगा। उन्होने बताया कि शोध प्रतिवेदन तैयार करना कोई आसान कार्य नहीं है यह एक कला है, इसके लिए प्रचुर मात्रा में ज्ञान, कल्पना, अनुभव और विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है इसके पूर्व कार्यक्रम का शुभारंम, माँ सरस्वती की प्रतिभा पर दीप प्रज्जवलन एवं माल्यार्पण से हुआ। अतिथि परिचय और स्वागत करते हुए महाविद्यालय प्रबन्धक डॉ० विजयलक्ष्मी मिश्रा ने अनुसन्धान के महत्व पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में प्रतिभाग, कर रही छात्राओ, संतोषी, प्रीति मिश्रा, सोनल, कौशिकी, रागिनी ने पूरी कार्यशाला के अनुभव साझा किये। कार्यक्रम के अन्त में कार्यशाला में प्रतिभाग कर रही सभी छात्राओ को प्रमाण पत्र वितरित किया गया। कार्यक्रम का संचालन अनुसन्धान समिति की समन्वयक डॉ० अपर्णा मिश्रा ने किया तथा आभार ज्ञापन आई क्यू ए सी समन्वयक डॉ० रेखा श्रीवास्तव ने किया। इस कार्यक्रम में अनुसन्धान समिति के सभी सदस्य डॉ० रेखा श्रीवास्तव, डॉ० स्वप्निल पाण्डेय, डॉ० सारिका जायसवाल, डॉ० ज्योत्सना त्रिपाठी, डॉ० आस्था प्रकाश, रागिनि मिश्रा, सन्तोषी, पूजा निषाद, दिव्या नायक, साबरीन तथा महाविद्यालय मे सभी प्रवक्तागण उपस्थित रहे।