सीआरसी गोरखपुर और मनोविज्ञान विभाग दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर के संयुक्त तत्वावधान में दिव्यांगता, मानसिक स्वास्थ्य एवं औद्योगिक परामर्श विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीआरसी गोरखपुर के निदेशक जितेंद्र यादव ने कहा कि केवल दिव्यांगता पुनर्वास ही नहीं बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी औद्योगिक परामर्श की आवश्यकता है। सीआरसी गोरखपुर इस लक्ष्य की प्राप्ति में पूरी तन्मयता के साथ लगा हुआ है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीआरसी गोरखपुर के पुनर्वास अधिकारी राजेश कुमार यादव ने कहा कि मनोविज्ञान का छात्र होने के नाते प्रत्येक व्यक्ति को औद्योगिक परामर्श के बारे में समझना चाहिए जो कि उनके व्यक्तित्व के विकास में सहायक है। सीआरसी गोरखपुर के नैदानिक सहायक श्री रॉबिन ने भाषा और वाणी दिव्यांगता से ग्रसित दिव्यांगों द्वारा महसूस की जाने वाली मनोवैज्ञानिक समस्याओं की चर्चा करते हुए कहा कि यदि कोई श्रवण बाधित दिव्यांगजन किसी प्रकार की मनोवैज्ञानिक समस्या का सामना कर रहा है तो वह सीआरसी गोरखपुर के नैदानिक मनोविज्ञान विभाग से संपर्क कर सकता है। कार्यक्रम का संचालन करते हुए कार्यक्रम समन्वयक नैदानिक मनोविज्ञान विभाग के सहायक प्राध्यापक श्री राजेश कुमार ने कहा कि आज की इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में प्रत्येक व्यक्ति कभी-कभी मानसिक स्वास्थ्य का शिकार होता है, इसके लिए उसे अपने दैनिक दिनचर्या में बदलाव करना चाहिए। स्वस्थ आहार-विहार करना चाहिए। योग तथा ध्यान की तरफ अपना ध्यान लगाना चाहिए। मनोविज्ञान विभाग के छात्रों ने इस कार्यक्रम में प्रतिभाग किया तथा दिव्यांगजनों के अभिभावकों के साथ वार्तालाप भी किया। इस अवसर पर सीआरसी गोरखपुर के सभी अधिकारी और कर्मचारी गण मौजूद रहे।
