गोरखपुर। घंटाघर रोड से लेकर पांडेयहाता रोड के दुकानदारों ने स्वेच्छा से बिना किसी प्रकार की ज़ोर जबरदस्ती के अपने वजूद अपने व्यापार को बचाने के लिए शांति प्रिय तरीके से अपनी दुकानें बंद रखी हैं। इसका मुख्य उद्देश्य प्रस्तावित विरासत गलियारे की जद में आने वाली दुकानों के आंशिक या पूरी तरह से कट जाने का शांति प्रिय विरोध है। प्रस्तावित गलियारा में 16.5 मीटर सड़क की चौड़ाई जिसमें सड़क के बीच से 8.25 मीटर दोनों तरफ की मार्केट को काटकर सड़क को चौड़ा करना है। इसकी जद में आने वाली दुकानों का वजूद पूरी तरह से मिट जाएगा और प्रभावित सभी दुकानदार सड़क पर आ जायेंगे जिनके पास वर्तमान में दूसरा कोई व्यापार नहीं है , अपने घर परिवार का पालन पोषण सभी दुकानदार इन्हीं दुकानों से करते हैं। मार्केट 60 साल से ज्यादा पुराना है। सारी दुकानें हमारे सभी के दादा पिता की विरासत है जिस पीढ़ी को हमलोग आगे बढ़ा रहे हैं। अगर ये दुकानें काट दी गई तो अभी लोग मेन मार्केट से मिट जायेंगे फिर अपने पैरों पर खड़े होने में पीढ़ियां बीत जाएंगी। ज़रूरत मार्केट को संगठित करने की व्यवस्थित करने की है ना कि मार्केट को काटकर मिटा देने की विरासत गलियारा बनना चाहिए विकास सहर्ष होना चाहिए लेकिन विरासत को साथ लेकर ना की विरासत को खत्म करके नुकसान कितना हो रहा है इसका ना तो आंकलन किया जा सकता है ना ही भरपाई की जा सकती है ना ही मुआवजे का आंकलन किया जा सकता है। मुख्य उद्देश्य होना चाहिए मार्केट को व्यवस्थित करना, अतिक्रमण हटाना, जाम की असली वजह को समझना और उसका उपाय करना, सुविधाएं बढ़ाना, पार्किग बनाना, शौचालय की समुचित व्यवस्था, ठेला गाड़ी इत्यादि को समय अनुसार व्यवस्थित करना, ई रिक्शा का संचलन संयमित करना, बिजली के तार खंभे हटाकर भूमिगत करना, नाला साफ सफाई और जलभराव की समस्या से निपटना, वाहनों के प्रवेश पर सामयिक प्रतिबंध लगाना इन सभी कार्यों को कैसे किया जाए इसपर प्रशासन को हम सभी सड़क के दुकानदारों से मिलकर बात करनी चाहिए और एक मीटिंग कर के प्रस्ताव बनाना चाहिए। हम सभी सड़क के दुकानदार वास्तविकता से भली भांति परिचित हैं एवम जमीनी हकीकत से पूर्णतया परिचित हैं। बिना दुकानों को पूरी तरह या आंशिक रूप से काटे भी व्यवस्थित किया जा सकता है उसकी एक रणनीति बनाने की आवश्यकता है। सीएम योगी हमारे अभिभावक हैं पिता तुल्य हैं हम सभी उनकी छत्रो छाया में पल रहे हैं बढ़ रहे हैं उनसे इतना ही अनुरोध है कि हमारे वजूद को मिटने से बचा लें हम सभी कृतार्थ होंगे।
