जीभ मुख्य रूप से मीठा, कड़वा, खट्टा और नमकीन,चार प्रकार के स्वादों की पहचान करती है। हमारी जीभ मांसपेशियों के ऊतकों से बनी होती है और इसकी ऊपरी सतह पर कुछ छोटे उभार होते हैं जिन्हें स्वाद कलिकाएं कहा जाता है। स्वाद कलिका में स्वाद ग्राही कोशिकाएँ होती हैं, जो रासायनिक संवेदी के रूप में कार्य करती हैं। जीभ का अगला भाग मीठे स्वाद के प्रति संवेदनशील होता है, पिछला भाग कड़वा स्वाद के लिए और पार्श्व भाग नमकीन और खट्टे स्वाद के प्रति संवेदनशील होता है। दर्द की जलन के कारण जीभ के दर्द रिसेप्टर्स द्वारा मिर्च का स्वाद लिया जाता है। हर इंसान की जीभ के अंदर की संरचना में अंतर होता है। शोध में पाया गया है कि इस अंतर से उसके स्वाद की पसंद ना पसंद अलग होती है। इनके अध्ययन से लोगों की अच्छे लगाने वाले भोजन को निर्धारित करने में मदद मिल सकती है। अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया है कि यह सच है कि हर इंसान की जीभ अलग तरह से स्वाद का अहसास करती है क्योंकि उसकी संरचना अलग तरह की होती है। हमारी जीभ में कई महीन सूक्ष्मजीवियों के समुदाय रहते हैं और इसके साथ ही उनकी सतह की संरचना हमारी जीभ को खास बना देते हैं। हर इंसान की जीभ अलग तरह की होती है और वह अलग स्वाद महसूस करता है। इसकी वजह जीभ की खास तरह की सरंचना होती है जो हर एक में अलग होती है। इसके जरिए यह पहचाना जा सकता है कि किसे किस तरह का खाना पसंद है। इंसान की शरीर में जीभ अनोखा अंग होता है। इसी की वजह से हम इंसान अलग-अलग स्वादों की पहचान कर पाते हैं। कई लोग मानते हैं कि एक डिश का स्वाद हर इंसान को अलग-अलग लग सकता है। अभी तक इसकी वैज्ञानिक तौर पर पुष्टि नहीं हो सकी थी। अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया है कि यह सच है कि हर इंसान की जीभ अलग तरह से स्वाद का अहसास करती है, क्योंकि उसकी संरचना अलग तरह की होती है। दरअसल हमारी जीभ में कई महीन सूक्ष्मजीवियों के समुदाय रहते हैं और इसके साथ ही उनकी सतह की संरचना हमारी जीभ को खास बना देते हैं। साइंटिफिक रिपोर्ट में प्रकाशित अध्ययन में पाया गया है कि जीभ में स्वाद की ग्रथियां अलग तरह का आकार और संरचना बनाती हैं जिससे हमें खास तरह के स्वाद पसंद होते हैं। ऐसा हर व्यक्ति के साथ अलग तरह से होता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि जीभ की महीन संरचना ने उन्हें पूरी तरह से चौंका कर रख दिया। जीभ में स्वाद और स्पर्श की पैपिले नाम की बड्स होती हैं जो कई तरह के आकार और स्थितियों के स्वरूप बनाती हैं। इस पैपिले की 48 फीसदी की सटीकता से पहचान हो सकती है। हर इंसान की जीभ में इसका अलग होना वैज्ञानिकों के लिए हैरान करने वाली बात थी। वैज्ञानिक इसे एक दूसरे नजरिए से भी देख रहे हैं। अगर कुछ खास लोगों या जनसंख्या के लिए उनके स्वाद क्षमता के अनुसार भोजन तैयार किया जा सके जिससे वे सही पोषण के साथ खाने का भी आनंद ले सकें, तो एक बड़ा बदलाव लाया जा सकता है. जीभ में फंजीफॉर्म पैपिले की संरचना से पता चलता है कि कोई चीज मीठी, खट्टी, या नमकीन है या किसी और स्वाद की हर एक वर्ग सेमी में ऐसे 200 स्वाद महसूस करने वाले पैकेट होते हैं।