"गांव आजीविका और हम" कार्यक्रम के तहत हमारे कृषि विशेषज्ञ कपिल देव शर्मा मक्का फसल की बुवाई के बारे में जानकारी दे रहे हैं । विस्तारपूर्वक जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें
इस कार्यक्रम में एक परिवार बात कर रहा है कि कैसे बढ़ती गर्मी से बचा जाए। वे चर्चा करते हैं कि शहरों में ज्यादा पेड़-पौधे लगाने चाहिए, पानी बचाना चाहिए, और लोगों को इन बातों के बारे में बताना चाहिए। और सभी को मिलकर अपने आसपास की जगह को ठंडा और हरा-भरा बनाकर रखना चहिये
उत्तर प्रदेश राज्य के मऊ जिला से रमेश कुमार यादव मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे हैं कि मंत्रालय ने मनरेगा राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम को मंजूरी दी उत्तर प्रदेश में, यह कानूनी रूप से गरीब मजदूरों के लिए बाध्यकारी है कि वे अपने गाँवों में रहें और मजदूरों के रूप में जीवन यापन करें। उन्हें एक वर्ष में सौ दिनों का काम दिया जाना चाहिए ताकि वे गाँव में अपना जीवन यापन कर सकें। इसे रिकॉर्ड किया जाएगा और सभी सदस्य यदि चाहें तो गाँव में 100 दिनों का काम पूरा कर सकते हैं। यदि उन्हें काम नहीं मिलता है, तो वे बेरोजगारी भत्ता का दावा कर सकते हैं।
उत्तर प्रदेश राज्य के मऊ जिला से रमेश कुमार यादव मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे हैं कि समाज में भी पुरुषों और महिलाओं के बीच भेदभाव और असमानता है, लेकिन महिलाओं के साथ ऐसा नहीं होना चाहिए। महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार होने चाहिए, महिलाएं खेती करती हैं, पुरुष कमाने के लिए बाहर जा रहे हैं, इसलिए देखा जा रहा है कि ज्यादातर महिलाएं खेती करती हैं। वे खेती का काम कर रहे हैं लेकिन समाज उन्हें जमीन के अधिकार से वंचित कर रहा है। लेकिन अगर देखा जाए, तो महिलाएं सबसे अधिक काम करती हैं, हर जगह महिलाओं को समान अधिकार मिलने चाहिए। जो लोग जागरूक नहीं हैं, उन्हें जागरूक किया जाना चाहिए और लोगों को यह समझाया जाना चाहिए कि महिलाएं पुरुषों की तुलना में अधिक काम कर रही हैं।
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महिलाओं का हमेशा भूमि का अधिकार वंचित समाज रख रहा है। समाज में हर जगह नौकरी में आने-जाने का अधिकार दें ताकि जो गरीब हैं वे जागरूक हों और जो अनजान हैं वे भी दिखाई दें। महिलाओं का सम्मान करें, महिलाओं को अधिकार दें, जागरूकता की कमी हो, जागरूकता पैदा करें, समाज और उन लोगों को जागरूक करें
आपका पैसा आपकी ताकत की आज की कड़ी में हम सुनेंगे और जानेंगे प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना से जुड़ी श्रोताओं के विचार
शुरू हो रहा है बच्चों से जुड़ी कहानियों और किस्सों का सिलसिला | जहाँ मनाएंगे बचपन, बच्चों के अंदाज़ में | सुनियेगा ज़रूर, बचपन मनाओ, बढ़ते जाओ और मोबाइल वाणी की ये खास पेशकश |
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भूमि पर महिलाओं का अधिकार बहुत कम रहा है, पहले कुछ भी नहीं था। महिलाओं के अधिकारों को धीरे-धीरे सरकार के कानून के तहत लाया गया जिसमें कुछ समाज को पता नहीं था कि महिलाएं अब हर तरफ कुछ न कुछ देखा जा रहा है कि महिला के नाम को भी जमीन की संपत्ति का अधिकार मिल रहा है। आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में पिछड़े वर्गों में यह बहुत देखा जाता है कि लोग महिलाओं को नहीं समझते हैं। आज भी उन्हें डर है कि अगर महिलाओं के नाम का इस्तेमाल किया जाए।
