उत्तर प्रदेश राज्य के मऊ जिला से रमेश कुमार यादव ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि समाज महिलाओं को भूमि का अधिकार नही देना चाह रहा है। हमारा देश पुरुष प्रधान है और महिलाओं का कद्र नही किया जा रहा है। पुरुष हर जगह अपना वर्चस्व रखना चाहता है। पुरुष महिलाओं को अधिकार या हक़ देना नही चाहते हैं। सरकार को सुनिश्चित करनी चाहिए कि महिलाओं को सम्मान मिले तथा हर जगह पुरुषों के बराबर अधिकार मिले।
"गांव आजीविका और हम" कार्यक्रम के तहत हमारे कृषि विशेषज्ञ श्री जिव दास साहू मूँगफली की खेती के बारे में जानकारी दे रहें हैं। अधिक जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें.
सुनिए डॉक्टर स्नेहा माथुर की संघर्षमय लेकिन प्रेरक कहानी और जानिए कैसे उन्होंने भारतीय समाज और परिवारों में फैली बुराइयों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई! सुनिए उनका संघर्ष और जीत, धारावाहिक 'मैं कुछ भी कर सकती हूं' में...
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माता-पिता के रूप में जहाँ हम परवरिश की खूबियाँ सीखते हैं, वहीँ इन खूबियों का इस्तेमाल करके हम अपने बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को बढ़ावा दे सकते है।आप अपने बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास को बढ़ाने और उन्हें सीखाने के लिए क्या-क्या तरीके अपनाते है? इस बारे में बचपन मनाओ सुन रहे दूसरे साथियों को भी जानकारी दें। अपनी बात रिकॉर्ड करने के लिए दबाएं नंबर 3.
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उत्तरप्रदेश राज्य के मौ जिला से रमेश कुमार यादव मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे हैं कि बारिश का आधा समय खतम हो गया है और अभी तक मानसूनी बारिश नहीं हुई है जिसके कारण किसान परेशान हैं उनके फसल बर्बाद हो रहे हैं। धान पानी के बिना सुख रहा है किसान पानी चला रहे हैं लेकिन उसका कोई मतलब नहीं है। बारिश नाममात्र भी नहीं है। वहीँ घाघरा नदी में उफान आ रहा है घाघरा नदी के किनारे बसने वाले लोग बाढ़ से घिर चुके हैं उनके धान की खेती पानी के वजह से गल गया है गन्ने की खेती खत्म हो गयी है। लोग अपने जानवरों के साथ दूसरे जगह भाग रहे। सड़कों में पानी भरने के कारण बच्चे विद्यालय नहीं जा पा रहे हैं
उत्तरप्रदेश राज्य के मौ जिला से रमेश कुमार यादव मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे हैं कि महिलाओं को समाज द्वारा भूमि के अधिकार से वंचित किया जाता है। यह वह समाज है जो महिलाओं के नाम पर भूमि लिखने के लिए तैयार नहीं है और न ही अपने अधिकार अर्जित करने के लिए उन्हें अपना सही हिस्सा देने के लिए तैयार है। जैसे एक माँ के अगर एक लड़की और एक लड़का है, तो लड़के का भूमि पर अधिकार है, लेकिन वहीँ लड़कियों को भूमि के अधिकार से वंचित किया जाता है। वह उन्हें यह देने के लिए सहमत हो जाता है कि हम लड़कियों के नाम पर जमीन नहीं देंगे, लड़कियों को जमीन में हिस्सा नहीं दिया जाएगा, लेकिन यह कानूनी रूप से ऐसा नहीं होना चाहिए लड़का या लड़की दोनों को हिस्सा मिलना चाहिए। दोनों को समान अधिकार हैं, अगर लड़की भी चाहे तो वह अपने माता-पिता की भूमि संपत्ति में आधा हिस्सा बन सकती है और समाज को भी इसकी आवश्यकता है। महिलाओं के नाम पर भी भूमि अधिग्रहण किया जाए, उन्हें भी भूमि का एक हिस्सा दिया जाए, यह भूमि स्वामित्व की बात है कि महिलाओं को हर जगह समाज द्वारा रोका जाता है। लड़कियों को बहुत कम लोगों द्वारा पढ़ाया जाता है जबकि लड़कों को अच्छे स्कूलों में पढ़ाया जाता है।
