निजी अस्पताल पर छापा मारा , लेकिन मजिस्ट्रेट और सिमो में टोनी मजिस्ट्रेट ने डीएम को कार्रवाई करने के लिए कहा , मऊ में निजी अस्पतालों के संचालन के लिए कोई निर्धारित नियम नहीं है । यही कारण है कि वाराणसी और मऊ जिला अस्पतालों को का हफ कहा जाता है क्योंकि यहां मुख्यालय सहित पूरे राज्य में सैकड़ों छोटे - बड़े डीलर काम कर रहे हैं , लेकिन बड़ी बात यह है कि जिले में इन अस्पतालों का संचालन का कोई पैमाना नहीं है । स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रशासन निर्धारित नहीं किया गया है । जिले के निजी अस्पतालों के मकड़ी के जाल में फंसे जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा सरकार के निर्देशों का उल्लंघन किया जाता है । इसका कारण यह है कि कई शिकायतों के बाद भी स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों के कानों में जूँ नहीं हैं । जिले में सैकड़ों अस्पताल क्लीनिक , डायग्नोस्टिक सिस्टर नर्सिंग होम , चाइल्ड केयर सर्जिकल और ट्रॉमा सेंटर आदि स्वैच्छिक तरीके से चलाए जा रहे हैं । यालय के पीछे स्थित ओम स्वास्थ्य अस्पताल में छापेमारी की गई , जिसमें अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा अधिकारी और नोडल डॉक्टर आर . एम . सिंह भी शामिल थे ।

मोहम्मदाबाद गण में कैबिनेट मंत्री बनने के बाद पहली बार पहुंचे थे , ने कार्यकर्ताओं को एक कैलेंडर जलाने और ढोल बजाने के लिए प्रेरित किया । स्वागत के बाद दरासिंह चौहान ने कहा कि इस बार भाजपा 400 सीटें जीतकर क्षेत्र में तीसरी बार सरकार बनाने जा रही है । मेरी हार का कारण यह था कि लेकिन इस बार मोदी जी का तूफान , भाजपा 400 से अधिक सीटें जीतकर तीसरी बार खेमे में सरकार बनाएगी । अरविंद राजभर को घोसी से लोकसभा का उम्मीदवार बनाए जाने पर कई कार्यकर्ता नाराज हैं , लेकिन समय आने पर ।

जनपदमऊ के ग्रामीण क्षेत्र में शिव मंदिर में मेले में सुबह से ही भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी । गरखोदली , एक बहुत ही प्राचीन शिव मंदिर , को कवलियों द्वारा सुबह चार बजे से देर शाम तक जला दिया जाता था । चरवाहों द्वारा शिकार किए जा रहे कांवड़िये , ग़ाज़ीपुर से गंगाजल लेकर आए और उसे पानी पिलाया , जबकि मौलनापुर दर्जनों गाँवों से चोरी हो गया था । काला राजमलपुर , पैसा खराल , गड़ी गढ़वा आदि गाँवों से श्रद्धालु पहुँचे और उन्होंने भांग और धतुरा का प्रसाद चढ़ाया ।

उत्तर प्रदेश राज्य के मऊ जिला से सुरेंद्रनाथ यादव मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे है की आपराधिक छवि के नेता को कभी संसद का सदस्य बनने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए , लेकिन विडंबना यह है कि सरकारी नौकरी पाने के लिए आपको दोषी नहीं होना चाहिए, लेकिन एक कानून निर्माता के पास सब कुछ होते हुए भी लोगों का वोट मिलता है और वह जीतकर खुद कानून निर्माता बन जाता है।

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