उत्तरप्रदेश राज्य के जिला श्रावस्ती से अर्जुन सिद्धार्थ , मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते है कि सरकार को भारत रत्न देने के साथ - साथ किसानों को उनका अधिकार भी देना चाहिए । आखिरकार , उनकी मांग भी बहुत छोटी सी है कि उनकी फसलों का उचित मूल्य मिले। किसानो को उनका अधिकार मिलना चाहिए।
उत्तरप्रदेश राज्य के जिला श्रावस्ती से अर्जुन सिद्धार्थ , मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते है कि वास्तव में महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा की संख्या कई गुना अधिक है । भले ही कुछ महिलाएं अपनी आवाज उठाती हैं , कई बार पुलिस ऐसे मामले दर्ज नहीं करना चाहते क्योंकि पुलिस को भी लगता है कि पत्नी को गुस्से में पति या पिता और भाई द्वारा पीटा जाना एक सामान्य बात है । घर की महिलाओं को नियंत्रित करना एक आम बात है और कई महिलाएं घर तोड़ने के डर से घरेलू हिंसा की शिकायत दर्ज नहीं कराती हैं और समाज ऐसा करने में उनका समर्थन करता है ।
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उत्तरप्रदेश राज्य के जिला श्रावस्ती से सुमित्रा वर्मा , मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती है कि किसी भी कामो में पुरुष महिलाओं का साथ क्यों नहीं देते और अगर साथ नहीं देते तो उनका कामों में समर्थन क्यों नहीं करते , क्यूंकि पुरुषों को लगता है महिलाओं का कामों में साथ या समर्थन करने में उनका अपमान होगा। पुरुषों को महिलाओं पर अत्याचार नहीं करना चाहिए।
उत्तरप्रदेश राज्य के जिला सुमित्रा वर्मा , मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती है कि किसानो को कोई सहायता नहीं मिली है। चुनाव के नजदीक आने पर यह प्रतीत होता है कि जो कुछ भी लागू किया गया है सरकार द्वारा वह सिर्फ वोट माँगने के लिए किया गया है
उत्तरप्रदेश राज्य के जिला श्रावस्ती से सुमित्रा वर्मा , मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती है कि लोग कहते है की महिलाओं को पूरी आजादी दी है लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं होता क्योंकि महिलाओं को केवल घर चलाने की अनुमति है । घर के लोगों की सेवा करने के लिए ,घर चलाने के लिए छूट दिया जाता है। महिलाएं अगर अपने लिए कुछ करती है या सोचती है तो लोगों को दिक्कत हो जाती है। महिलाएं अपने सपनो को छोड़ कर परिवार की सेवा में लग जाती है।
उत्तरप्रदेश राज्य के श्रावस्ती जिले की सुमित्रा वर्मा बताती हैं कि अगर बच्चों को कुछ सिखाना है , तो उन्हें अच्छी तरह से समझाया जाना चाहिए ताकि बच्चे समझ सकें और सीख सकें । किसी को कभी भी डांटकर या अंक देकर नहीं पढ़ाना चाहिए , बल्कि उन्हें प्यार और स्नेह के साथ पढ़ाना चाहिए ताकि बच्चों को भी किसी समस्या और पूर्वाग्रह का सामना न करना पड़े ।
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