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"गांव आजीविका और हम" कार्यक्रम के तहत हमारे कृषि विशेषज्ञ कपिल देव शर्मा ग्रीष्मकालीन खीरे की खेती से सम्बंधित जानकारी दे रहे हैं । विस्तृत जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें...
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के बारे में एक महिला क्या सोचती है... यह जानना बहुत दिलचस्प है.. चलिए तो हम महिलाओं से ही सुनते हैं इस खास दिन को लेकर उनके विचार!! आप अपने परिवार की महिलाओं को कैसे सम्मानित करना चाहेंगे? महिला दिवस के बारे में आपके परिवार में महिलाओं की क्या राय है? एक महिला होने के नाते आपके लिए कैसे यह दिन बाकी दिनों से अलग हो सकता है? अपने परिवार की महिलाओं को महिला दिवस पर आप कैसे बधाई देंगे... अपने बधाई संदेश फोन में नम्बर 3 दबाकर रिकॉर्ड करें.
विश्व वन्यजीव दिवस जिसे आप वर्ल्ड वाइल्डलाइफ डे के नाम से भी जानते है हर साल 3 मार्च को मनाया जाता है जिसका मुख्य उद्देश्य है की लोग ग्रह के जीवों और वनस्पतियों को होने वाले खतरों के बारे में जागरूक हो इतना ही नहीं धरती पर वन्य जीवों की उपस्थिति की सराहना करने और वैश्विक स्तर पर जंगली जीवों और वनस्पतियों के संरक्षण के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य या दिवस मनाया जाता है.विश्व वन्यजीव दिवस के उद्देश्य को पूरा करने के लिए है हर वर्ष एक थीम निर्धारित की जाती है जिससे लोगो में इसके प्रति ज्यादा से ज्यादा जागरूकता को बढ़ावा मिले . हर वर्ष की तरह इस वर्ष 2024 का विश्व वन्यजीव दिवस का थीम है " लोगों और ग्रह को जोड़ना: वन्यजीव संरक्षण में डिजिटल नवाचार की खोज" है। "तो आइये इस दिवस पर हम सभी संकल्प ले और वन्यजीवों के सभी प्रजातियों और वनस्पतियों के संरक्षण में अपना योगदान दे।
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उत्तरप्रदेश राज्य के बहराइच जिला से सरस्वती ने मोबाइल वाणी के माध्यम से महंगी शिक्षा के बारे में सच्चाई के बारे में बात कर रहे हैं । आज के समय में स्कूल एक वस्तु बन गए हैं , जहाँ सब कुछ बेचा जाता है । बहुत जोर नहीं है लेकिन फैशन पर जोर है , उन्हें नहीं लगता कि ये बच्चे भविष्य होंगे , हमारे देश का विकास करेंगे , अपनी शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करेंगे , उन्हें अच्छा ज्ञान देंगे , लेकिन अब उन्हें शिक्षा दें । जो स्कूल शिक्षा का मंदिर नहीं है , बल्कि एक मॉल बन गया है जहां किताबें बेची जाती हैं , कपड़े बेचे जाते हैं , जूते बेचे जाते हैं , मोजे बेचे जाते हैं , ट्यूशन मास्टर भी बेचे जाते हैं और कुछ स्कूलों में धर्म भी बेचा जाता है । अंत में , शिक्षा की बिक्री और ये सारी चीजें लागत के दस गुना दाम पर बेची जाती हैं , ऐसे में शिक्षा इतनी महंगी होती जा रही है , स्कूलों को एक वस्तु बनाया जा रहा है , गरीब घरों के बच्चे कहाँ पढ़ सकेंगे ?
