उत्तरप्रदेश राज्य के बहराइच जिला से विशाल सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से ननके यादव से बातचीत की। बातचीत में ननके यादव का कहना है बेटियों को पिता की सम्पत्ति में अधिकार मिलना चाहिए वे भी दूसरे बच्चों के बराबर हैं। शादी से पहले उनका पूरा अधिकार होता है शादी के बाद उनका अधिकार ससुराल में मिलता है। उनका कहना है महिलाओं को शिक्षित होना जरूरी है शिक्षित हैं तो बहुत कुछ है अशिक्षित हैं तो कुछ भी नहीं। सरकार के द्वारा बहुत सी योजना चलाई जा रही हैं लेकिन जो महिलाएं अशिक्षित हैं खासकर गांव देहात में कुछ लोग अशिक्षित परिवार से होते हैं वे लड़कियों की शिक्षा पर ध्यान नहीं देते हैं। गांव की बहने माताएं दो सौ रूपए के लिए देहाड़ी पर जाती हैं। अशिक्षित महिलाओं का शोषण किया जा रहा है उनका कहना है महिलाएं घर से बाहर नहीं निकले अपने घर चूल्हा चौका ,बर्तन करे। पुरुषों को इस पर ध्यान देना चाहिए महिलाएं घर से निकलेंगी नहीं तो जागरूक नहीं होंगी
उत्तरप्रदेश राज्य के बहराइच जिला से विशाल सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से हिमांशु रावत से बातचीत की। बातचीत में हिमांशु रावत का कहना है महिलाओं को जागरूक करने के लिए सबसे पहले शिक्षित करना चाहिए। शिक्षा नहीं रहेगी तो महिलाएं जागरूक नहीं हो पायेंगी। इसके लिए भारत सरकार महिलाओं के शिक्षा पर जोर दे। हमारी जो माता बहने हैं जो हमारी बहुयें हैं उनके शिक्षा पर सबसे ज्यादा ध्यान देना चाहिए। जागरूक करने पर ध्यान देना चाहिए। अगर शिक्षा नहीं हैं तो वे कुछ भी हासिल नहीं कर पायेंगी। सरकारी योजनाएं आयंगी तो वे पढ़ी लिखी नहीं रहेंगी तो उन्हें जानकारी नहीं मिल पाएगी कि योजनाओं का कैसे फायदा उठाया जा सकता है । उनका कहना है जब तक पढ़ी लिखी नहीं रहेंगी तो महिलाओं को भूमि अधिकार नहीं मिल पाएगी। महिलाओं का भूमि पर अधिकार शादी से पहले होता है शादी के बाद पूरा अधिकार ससुराल में होता है
उत्तरप्रदेश राज्य के बहराइच जिला से विशाल सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से घनश्याम तिवारी से बातचीत की। बातचीत में घनश्याम तिवारी का कहना है लड़कियों को पिता के जमीन में हिस्सा नहीं मिलना चाहिए शादी के बाद भी मायके में अधिकार नहीं मिलना चाहिए। शादी के बाद उन्हें ससुराल में पूरा अधिकार मिलेगा।उनका कहना है महिलाओं को शिक्षा जरूरी है। सरकार द्वारा बहुत सारी योजनाएं निकाली गयी हैं लेकिन शिक्षा की कमी के कारण वे उसका लाभ नहीं ले पा रही हैं। लेकिन उन्हें योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए इसके लिए शिक्षा जरूरी है। अधिकांश गाँवों में, ऐसा अक्सर हो रहा है कि लोग कुछ महिलाओं को नहीं पढ़ा रहे हैं और उन्हें घर से निकलने नहीं देते हैं। जबतक वे घर से बाहर नहीं निकलेंगी जागरूक नहीं हो पायेंगी
उत्तरप्रदेश राज्य के बहराइच जिला से विशाल सिंह मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे हैं कि महिलाओं को सम्पत्ति में अधिकार के साथ समानता का भी अधिकार देना चाहिए। महिलाओं को शादी के पहले जिस हिसाब से लड़कों का अधिकार रहता है उसी तरह से बहन को अधिकार मिलना चाहिए क्यूंकि लड़का और लड़की दोनों एक समान हैं एक कोख से जन्म लेती हैं । समाज में लोगों का कहना है कि लड़कियों को शादी से पहले मायके में पूरा अधिकार होना चाहिए और उसके बाद उनका अधिकार ससुराल में हो जाता है। और ज हमारे लड़के हैं यदि लड़कियों को भूमि में हिस्सा दे दिया जाता है तो बच्चे क्या करेंगे। लड़कियां तो अपने ससुराल में जाकर घर बसा लेंगी उन्हें भूमि मिलेगी और वे पुरे घर की मालकिन हो जायेंगी। हमारे जो बच्चे हमारे पास होंगे उन्हें जमीन नहीं दिया जाएगा तो वे दर दर की ठोकरे खायेंगे। सबसे बड़ी कमी है कि वे घर का पूरा खर्चा चलाते हैं उसके बाद शादी विवाह कर देंगे। हमारे समाज में शिक्षित होना भी आवश्यक है, यदि महिलाओं को शिक्षा नहीं मिलेगी तो उन्हें किसी भी योजना का लाभ नहीं मिलेगा और योजना का लाभ उठाने के लिए उन्हें शिक्षित होना आवश्यक होगा और घर से बाहर जाना होगा।
उत्तर प्रदेश राज्य के बहराइच जिला से विशाल सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से सीता पति से बातचीत की। बातचीत में उन्होंने बताया कि महिलाओं को मायके में भूमि अधिकार नहीं मिलना चाहिए और उनका अधिकार शादी के बाद ससुराल में होता है. यदि भाई माता पिता कोई नहीं हैं तो पाटीदार ले लेते हैं बच्चों को नहीं मिलता। उनका कहना है कि महिलाओं को शिक्षा जरूरी है महिलाओं को घर से नहीं निकलने दिया जाता है मायके वाले कहते हैं उनके घर में उनका कोई नहीं है जब तक माँ बाप हैं तो वे आना जाना करते हैं। साथ ही उन्होंने बताया उन्हें योजनाओं का लाभ नहीं मिला है।
उत्तरप्रदेश राज्य के बहराइच जिला से शालिनी पांडेय मोबाइल वाणी के माध्यम से नेहा पाण्डेय से बातचीत की। बातचीत में उन्होंने बताया कि अभी भी महिलाओं और पुरुषों के बीच भेदभाव किया जाता है। वे जिस स्कूल में पढ़ाते हैं वहां पर पुरूष शिक्षकों को अधिक वेतन दिया जाता है जबकि महिला शिक्षकों को निम्न सोचा जाता है उनको कम सीलेरी दी जाती है । कुछ बच्चे भी कुछ पेरेन्ट्स भी जो पिछले कुछ वर्ग के हैं जो पुराने हैं वो लोग अभी भी यही सोचते हैं कि लड़की है दूसरे घर चली जाएगी उसका क्या है लड़के अपने हैं अपने घर रहेंगे उनके लिए शिक्षा बहुत महत्वपूर्ण है और यह बहुत महत्वपूर्ण है कि वे शिक्षित हों। लेकिन लोगों की सोच बदलने की बहुत जरूरत है और शिक्षा बहुत जरूरी है वे पढ़े तभी उन्हें पता चल पाएगा कि आजकल पुरुषों और महिलाओं के बीच कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। उनका कहना है पिता की सम्पत्ति में बेटियों का अधिकार होता है जिस तरह बेटा होता है उसी तरह बेटियाँ होती हैं। बेटियों को दो घर देखना होता है वे ससुराल जाती हैं लेकिन अपने मायके का सोचती रहती हैं। लेकीन जब वे मायके जायें तो वहां पर उनका सम्मान हो इज्जत हो ,अगर हमारी शादी हो गयी तो हमारी इज्जत नहीं रह जाती। वो खत्म हो जाता है क्यूंकि हमारे माता पिता भाई भौजाई यही लोग ही भेदभाव करने लगते हैं। यह हर जगह चल रहा हमें इसे खत्म करने की जरूरत है माता पिता की सम्पत्ति में पुत्री का अधिकार होना ही चाहिए
उत्तरप्रदेश राज्य के बहराइच जिला से शालिनी पांडेय मोबाइल वाणी के माध्यम से कलावती देवी से बातचीत की। बातचीत में उन्होंने बताया कि पिता के पास जमीन कम है और बेटा बेटी दोनों हैं तो बेटी को जमीन नहीं मिल सकता है। जब बेटी का विवाह हो जाएगा तो वे होने ससुराल में जमीन पायेंगी। अगर पिता की जमीन ज्यादा है तो बेटी को जमीन में अधिकार मिल सकता है। साथ ही जिनके पास जमीन थोड़ी हैं और लड़का एक हैं और लड़की भी एक हैं तो बेटी जब अपने घर जायेंगी वहां जमीन में हिस्सा पायेंगी और लड़का अपने घर का हिस्सा लेगा
उत्तरप्रदेश राज्य के बहराइच जिला से शालिनी पाण्डेय मोबाइल वाणी के माध्यम से निशा से बातचीत की। बातचीत में उन्होंने बताया कि सामाजिक मानदंड और परंपराएं अभी भी महिलाओं के लिए एक चुनौती बनी हुई हैं , जैसे कि अगर वे समाज में कोई काम कर रही हैं तो बहुत सारी चुनौतियों के वजह से उन्हें बहुत कुछ करने को नहीं मिलता है। निशा का कहना है कि मायके में जमीन मिलना चाहिए उनके चार भाई है यदि वे जमीन में हिस्सा लेती हैं तो भाई के साथ रिश्ते में दरार आ सकती है
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