भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह दिव्य है ग्राम जोबा में दूसरे दिन जारी राम कथा में उमड़ी भारी भीड़ आमगांव बड़ा भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह दिव्य है। माता पार्वती की कठिन तपस्या का परिणाम है कि भगवान शिव ने अपनी शक्ति के रूप में चयन किया। उक्त आशय के उद्गार कृष्णनुरागी अभिषेक मिश्रा ने 16 जनवरी से प्रारंभ श्री राम मंदिर में विश्वास परिहार द्वारा आयोजित दूसरे दिन की राम कथा मैं शिव पार्वती विवाह प्रसंग में कहे उन्होंने आगे शिव पार्वती के विवाह की कथा का श्रवण कराते हुए कहा कि नंदी पर सवार भोलेनाथ जब भूत-पिशाचों के साथ बरात लेकर हिमाचल पहुंचे तो माता पार्वती के माता पिता बारात में सम्मिलित भूत, प्रेत औघड़ को देखकर अचंभित रह गए, लेकिन माता पार्वती ने खुशी से भोलेनाथ को पति के रूप में स्वीकार किया। कथा मर्मज्ञ पंडित अभिषेक मिश्रा ने बताया कि माता पार्वती के विवाह में उनकी तरफ से उच्च कुलों के राजा-महाराजा शामिल हुए, लेकिन शिव जी की ओर से कोई रिश्तेदार नहीं पहुंचा था, श्री राम कथा में उपस्थित श्रद्धालुओं के समक्ष भगवान शिव और पार्वती विवाह का रोचक प्रसंग का व्याख्यान करते हुए पूज्य गौरी जी ने कहा कि शिव दुनिया के सबसे तेजस्वी थे। वे पार्वती को अपने जीवन का हिस्सा बनाने वाले थे। भगवान शिव एवं पार्वती की शादी में सभी देवी देवता और असुर भी वहां पहुंचे। जानवर, कीड़े-मकोड़े और सारे जीव उनके विवाह में उपस्थित हुए। यहां तक कि भूत-पिशाच, प्रेत भी उनके विवाह में बाराती बनकर पहुंचे। विवाह प्रसंग सुन श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। कथा में आगे वर्णन करते हुए कृष्णनुरागी अभिषेक मिश्रा ने कहा कि धर्म में भगवान शिव को देवों का देव महादेव माना जाता है । जब सृष्टि की संरचना हुई तो देवों के देव महादेव उसके पहले से उपस्थित थे। भारतीय संस्कृति में शिव के अर्धनारीश्वर रूप का भी उल्लेख है। जब शिव की पूजा की जाती है तो जीवन में सुख अनुभूति होती है। सारे क्लेश मिट जाते हैं। लोगों का आपसी द्वंद्व लड़ाई समाप्त हो जाता है और इसीलिए विवाह रूपी बंधन के सबसे उत्तम उदाहरण शिव और पार्वती है।