उत्तर प्रदेश राज्य के सिद्धार्थनगर जिले से मोबाइल वाणी संवाददाता हरिवंश प्रताप जानकारी दे रहे हैं कि, शरीर एक संबंध है आज शरीर का संबंध है आत्मा से और आत्मा जी शरीर में है वही शेयर जीवित है जिसमें प्राण नहीं है वह शरीर किसी काम का नहीं तो ऐसे शरीर जिसमें प्राण है वह सब कुछ कर सकता है उसमें करने की क्षमता है और जिसमें प्राण ही नहीं है वह क्या कर सकता है तो करता तो सब कुछ इसमें रहकर आत्मा है फिर भी हमारा शरीर करते हुए दिखाई पड़ता है और वह आत्मा किसका अंश है वह आत्मा परमात्मा का अंश है इसीलिए हमको समझना चाहिए की जो भी कष्ट होता है वह हमारे शरीर को गाव लगता है दिखता है हमको शरीर पर प्रकाष्ठ आत्मा को होता है लेकिन केवल कष्ट ही होता है और मारता है केवल शरीर और कभी भी चाहे वह किसी के माध्यम से हो या किसी के वाणी से हो कष्ट आत्मा को ही होता है.
