शक्तिपीठ कड़ाधाम में आयोजित हो रही श्री मद्भागवत कथा के तीसरे दिन गुरुवार को आचार्य त्रिभुवन नंदन महाराज ने भक्त प्रह्लाद के जन्म व उनके जीवन के बारे में बताया की भक्त प्रह्लाद दैत्य कुल में जन्म लिये थे।दैत्य कुल में जन्म लेने के पश्चात भी भक्त प्रह्लाद भगवान विष्णु की भक्ति में हमेशा लीन रहते थे! जिसके कारण आज तक उनका नाम भगवान विष्णु के सबसे बड़े भक्तों के रूप में माना जाता है।उनका पिता हिरण्यकश्यप भगवान ब्रह्मा से मिले वरदान के फलस्वरूप अति-शक्तिशाली हो चुका था। इसी अहंकार में उसने विष्णु को भगवान मानने से मना कर दिया और स्वयं को भगवान की उपाधि दे दी। तीनों लोकों में जो कोई भी विष्णु की पूजा करता, वह उसे मरवा डालता किंतु जब उसने अपने स्वयं के पुत्र को ही विष्णु भक्ति में लीन देखा तो क्रोध की अग्नि में जलने लगा।उसने अपने पांच वर्ष के छोटे से पुत्र प्रह्लाद को मारने की कई बार चेष्ठा की लेकिन हर प्रयास असफल सिद्ध हुआ। ! आचार्य त्रिभुवन नंदन महाराज ने बताया की एक दिन जब हिरण्यकश्यप प्रह्लाद के ऊपर अत्याचार कर रहा था तब भगवान ने नृसिंह का अवतार धारण कर हिरण्यकश्यप का वध कर डाला।
