नानपारा(बहराइच) : भारत-नेपाल सीमा से सटे चर्दा स्टेट को राजा जोध ¨सह ने बसाया था। 1857 की लड़ाई में बेगम हजरत महल के साथ राजा जोध ¨सह ने अंग्रेजों से लोहा लिया था। समय के साथ ही चर्दा किला का महज अवशेष ही बचा है, जो वर्तमान में एक छोटे से गांव के रूप में सिमट चुका है। गांव के बीच स्थित बाबा बलदेव प्रसाद का सिद्धपीठ दोनों देशों के सीमावर्ती क्षेत्रों में रह रहे लोगों के आस्था का केंद्र है। आस्था की ड्योढ़ी से मांगलिक कार्यक्रम का शुभारंभ दशकों से चली आ रही है। आज भी यहां आस्था का सैलाब उमड़ता है।इन पर नाज है : चर्दा नरेश का खंडहर हो चुका किला गौरवपूर्ण इतिहास को संजोए है। आजादी की लड़ाई में किला भले ही वीरान हो चुका हो, लेकिन राजा जोध ¨सह के नाम से ही चर्दा आज भी आबाद है। क्षेत्र के लोग चर्दा स्टेट की ऐतिहासिकता पर आज भी गर्व करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नेपाल के लोग चर्दा स्टेट के नाम से इस गांव को पुकारते हैं तो गांव के पुरोहित रहे रुद्र प्रताप त्रिपाठी के नाम से पुजारीपुरवा गांव भी आबाद है।
