*कवियों ने कविताओं एवं गीतों से श्रोताओं को किया मंत्रमुग्ध, गणेश महोत्सव में कवि सम्मेलन के दौरान देर रात तक कवियों ने बांधे रखा समां* *#कछौना(हरदोई):* 12वें गणेश महोत्सव के तत्वावधान में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। मां शारदे की वंदना से कवि सम्मेलन का आरंभ किया गया। देर रात तक कवियों ने हास्य, प्रेम, वीर रस, देश भक्ति की कविताएं सुनाकर लोगों का मन मोह लिया। कवियों ने एक से बढ़कर एक कविताएं सुनाई। मुख्य अतिथिगण जिला अध्यक्ष भाजपा अजीत सिंह बब्बन, जिला पंचायत अध्यक्ष पति पी.के. वर्मा, कवि सम्मेलन के प्रायोजक प्रधानाचार्य जानकी प्रसाद इंटर कॉलेज प्रदीप पटेल को कमेटी द्वारा स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया। युवा गीतकार दिव्यांशु शुक्ला ने मां शारदे का गीत प्रस्तुत किया "चित्र तेरे जब तब मन में आ जाते हैं तुम्हें लिखूँ मुक्तक सुंदर हो जाते हैं, तुम पर जितने सुंदर मुक्तक लिखता हूं उनसे सुंदर तुम्हारी बातें हैं"। मैनपुरी से ओजस्वी कवि मनोज चौहान ने देशभक्ति की कविताओं से श्रोताओं को ऊर्जा से भर दिया "भक्त हो तो तुम्हें भगवान दिखाई देंगे सारे कष्टों के समाधान दिखाई देंगे, मंदिरों में ना सही सरहदों पर जाओ तो तुमको हर फौजी में हनुमान दिखाई देंगे", "वतन की आन बान शान जिंदा है हमारे देश के दुश्मन अभी हमारे खून में दिल्ली का चौहान जिंदा है।" हास्य कवि युवा बाराबंकी से विकास बोरवाल ने हास्य की कविताओं से श्रोताओं को लोटपोट कर दिया "किसी खंजर से ना तलवार से जोड़ा जाए, सारी दुनिया को चलो प्यार से जोड़ा जाए, ये किसी शख्स को दोबारा न मिलने पर प्यार के रोग को आधार से जोड़ा जाए"। नवल सुधांशु गीतकार लखीमपुर ने गीत "सारी नफरत को मिटाने आए हैं बात यह पते की बताने आए हैं, जैसे हम राम का मंदिर बनाने आए हैं" दूसरा गीत "नफरतों से नाता तोड़ लेना, वतन की ओर रुख मोड़ लेना, पराये मुल्क पर जान पर आफत पड़े, मेरे बेटे तिरंगा उठा लेना"। रुचि दुबे श्रंगार कवियित्री अयोध्या ने कविता प्रस्तुत की "एक पल में हजारों सदी काट दी, भाग्य के लेख की त्रासदी काट दी, आपकी प्रेम में जिंदगी काट दी, प्रेम पढ़ना हो तो प्राण पढ़ लेना, नैन अर्जुन के बाण पढ़ लेना, मेरे मन का पुराण पढ़ लेना।" तेरे वजूद से जिंदा है शायरी, वरना कलम दवात और कागज समेट लेते हम"। प्रेम, विरह, वेदना, नारी की पीड़ा पर गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं का मन मोह लिया। बिटियों पर कविता प्रस्तुत की "यह तो नदिया के तरंगों की तरह होती हैं, बिटिया होली के रंगों की तरह होती हैं, बड़ी मासूम में उड़ानें भी, यह बारिशों में पतंग की तरह होती हैं"। वीर रस के ओजस्वी कवि गौरव चौहान इटावा से कछौना की धरती पर श्रोताओं को सनातन धर्म से गदगोर कर दिया। वीर रस के गीतों से लोगों में उत्साह भर दिया "हिंदुस्तान खड़ा है वीरों की कुर्बानी से यह मुल्क शहीदों की चिताओं से" दूसरी कविता "भक्त हो तो तुम्हें खुशियों से ज्यादा गम की बंदगी, ऐसे ही अलमस्त अपनी जिंदगी"। हास्य कवि अखिलेश द्विवेदी ने "जो पढ़े लिखे वह संतरी बने, अपराधी माफिया वह मंत्री बने, जिसने विवाह करके अपनी पत्नी छोड़ दी, वह देश के प्रधानमंत्री बने।" हरदोई जिले के युवा कवि अजीत शुक्ला ने मंच का बखूबी संचालन किया। वह युवाओं के आइकॉन हैं। उन्होंने कविता प्रस्तुत की "झंझावात जीवन के सभी को दर्द देते हैं, गम सभी का भूल कर हंसने को चले आए"। हास्य कविताओं से अपनी मस्त मौला व्यक्तित्व से अखिलेश द्विवेदी ने श्रोताओं को खूब गुदगुदाया।
