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आपका पैसा आपकी ताकत की आज की कड़ी में हम जानेंगे एसएचजी यानि की स्वयं सहायता समुह से जुड़ने के क्या फायदे हैं और इससे जुड़ कर कैसे आप अपने जीवन में बदलाव ला सकते हैं।
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आज की युवा पीढ़ी महिला अधिकारों को एक नए नजरिए से देख रही है। जहां पहले अधिकारों की लड़ाई सड़क से संसद तक सीमित थी, वहीं अब यह लड़ाई डिजिटल दुनिया तक पहुंच चुकी है। सोशल मीडिया, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और डिजिटल कैंपेन यह सब उसके नए हथियार हैं.
भारत में खेती से जुड़ें कामों में महिलाओं की भागीदारी 70% के लगभग है जबकि वास्तिविकता में यह 15 प्रतिशत के करीब आती है सरकारी आंकड़ों के अनुसार लगभग 30% महिलाओं को ही “किसान” के तौर पर जाना जाता है. यह भारत में कामकाजी महिलाओं का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा खेती और उससे जुड़े कार्यों में लगा हुआ है.
बिहार राज्य के औरंगाबाद जिला से सलोनी ने मोबाइल वाणी के माध्यम से भूमि अधिकार पर देवी कुमारी से साक्षात्कार लिया।देवी कुमारी ने बताया कि सरकार मदद करेगी तो जमीन महिलाओं के नाम हो पाएगा। सरकार को महिलाओं के लिए सोचना चाहिए और कार्य करना चाहिए। अभी महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण है।इससे अधिक आरक्षण और जमीन में अधिकार दिलवाना चाहिए
बिहार राज्य के औरंगाबाद जिला से सलोनी ने मोबाइल वाणी के माध्यम से भूमि अधिकार पर सुनीषा कुमारी से साक्षात्कार लिया।सुनीषा कुमारी ने बताया कि महिलाओं द्वारा जमीन का अधिकार माँगना उचित है। पुरुष के नाम जमीन रजिस्ट्री हो सकता है तो महिलाओं के नाम भी रजिस्ट्री होना चाहिए। यदि इनके पिता ख़ुशी से इनको जमीन देंगे तो ये जरूर लेंगी।
बिहार राज्य के औरंगाबाद जिला से सलोनी की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से रीत कुमारी से हुई। रीत कुमारी यह बताना चाहती हैं कि पति चाहेंगे तो इनके नाम से जमीन हो जायेगा लेकिन वह नहीं चाहते हैं। पुरुष के नाम से जमीन रहेगा तो वह इनके नाम से जमीन जरूर करते
बिहार राज्य के औरंगाबाद जिला से सलोनी की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से जुली से हुई। जुली यह बताना चाहती हैं कि वह खेती बाड़ी करती हैं। इससे उनका आर्थिक स्थिति बदल रहा है
