झारखण्ड राज्य के टाटानगर से श्रेया ने मोबाइल वाणी के माध्यम से महिला भूमि अधिकार का मतलब है की महिलाओं को पुरुषों के बराबर भूमि और सम्पत्ति में क़ानूनी अधिकार मिले। जो उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाता है, सुरक्षा प्रदान करता है और निर्णय लेने की शक्ति देता है।भारत में हिन्दू उत्तराधिकारी अधिनियम 2005 पैतृक सम्पत्ति में बेटियों को बेटों के समान अधिकार देता है
