जन्म- प्रमाण पत्र व मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने में अब कोई समस्या नहीं है। पूरे जनपद के हर ग्राम पंचायत के लिए एक-एक जन्म-मृत्यु रजिस्टार सेक्रेटरी या ग्राम पंचायत अधिकारी नामित किए गए हैं। और उसी प्रकार से नगर निगम के अंतर्गत 8 जोन बनाए गए हैं। जहां नगर जोन अधिकारी बैठते हैं,उनके कार्यालय में जन्म- मृत्यु का पंजीकरण किया जाता है। प्रमाण पत्र दिया जाता है। जरूरी है कि जन्म और मृत्यु का पंजीकरण करना है। यह कानूनी कर दिया गया है। और जहां पर मृत्यु होगी जन्म या मृत्यु रजिस्टार जो होता है उनका प्रमाण पत्र निर्गत करते हैं विशेष करके इसी बात का ध्यान रख करके आपको आवेदन पत्र देना होगा यदि नगर क्षेत्र के चिकित्सालय में अगर किसी का जन्म या मृत्यु होता है। इसकी सूचना नगर जोन को दिया जाएगा जिस नगर जोन में चिकित्सालय पड़ता है और इस पर उसका जन्म या मृत्यु का प्रमाण पत्र निर्गत कर दिया जाएगा जिला स्वास्थ्य सूचना अधिकारी हरिवंश यादव कहा कि जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र आवेदन करने के लिए पोर्टल पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। और सीधे पोर्टल पर इसकी सूचना नगर निगम से संबंधित जोन को दे सकते है। उन्होंने बताया कि कोई भी अस्पताल इसके लिए हीला हवाली करता है। तो उसके खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है। जन्म मृत्यु की घटनाओं को अगर 21 दिन के अंदर पंजीकृत कर दिया जाता है,तो उसके लिए कोई शुल्क नहीं होता है।अगर 21 दिन के बाद जमा किया जाएगा तो विलंब शुल्क लगेगा

शिक्षा का हमारे जीवन में क्यों इतना महत्व है और हर व्यक्ति को शिक्षित होना क्यों जरूरी है, इसी को एक छोटी सी कविता में बताया गया है कि शिक्षा से ही प्रगति है और शिक्षा से ही हमारी पहचान है

नागरी प्रचारिणी सभा परिसर में 6.5 करोड़ रुपये की लागत से ऑडिटोरियम बनेगा। प्रदेश सरकार के पर्यटन और संस्कृति विभाग के सहयोग से सभा परिसर के उत्तरी छोर पर प्रस्तावित इस ऑडिटोरियम में कॉन्फ्रेंस हॉल, ओपन एयर थिएटर और कैफेटेरिया भी बनेंगे। यह जानकारी विश्वेश्वरगंज स्थित नागरीप्रचारिणी सभा में प्रेसवार्ता में प्रधानमंत्री व्योमेश शुक्ल ने दी। उन्होंने कहा कि कार्यदायी एजेंसी के रूप में यूपीपीसीएल का चयन हुआ है। रंगमंच के कलाकारों के लिए यह ऑडिटोरियम सबसे मुफीद स्थान बनेगा। व्योमेश शुक्ल ने बताया कि सभा के पुस्तकालय में मौजूद 25 हजार पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण किया जाएगा। सभा ने 80 पुस्तकों का संकलन कर लिया है। उन्हें जल्द ही विक्रय के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। इनमें कबीर, सूर, तुलसी के अलावा ख्यातिलब्ध साहित्यकारों की रचनाएं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि नागरी प्रचारिणी सभा आने वाले दिनों में कई योजनाओं पर काम शुरू करेगी। पांडुलिपियों का वैज्ञानिक डाटाबेस तैयार करने और इस बौद्धिक संपदा को आम लोगों के लिए सुलभ बनाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन के साथ बात हो चुकी है। मिशन के निदेशक अनिर्बान दास जल्द ही सभा का दौरा करेंगे।

वाराणसी में पिछले दिनों हुए बारिश से पक चली सरसों के साथ फूल वाली अरहर, चना आदि फसलों को नुकसान की आशंका है। खेतों में काटकर रखी गई अगैती सरसों के सड़ने का डर है। कल्लीपुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष डॉ. नरेंद्र रघुवंशी ने बताया कि खेतों में बारिश का पानी नहीं जमा । इससे सब्जियों, गेहूं और आलू की फसलों को बहुत नुकसान नहीं होगा। सरसो पर फंगस और दलहनी फसलों का. फूल झड़ने की आशंका बनी हुई है।

वाराणसी के चौक स्थित गेट नंबर 4 पर गुरुवार शाम मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के कार्यकर्ता सत्यम शिवम सुंदरम महामंत्री के नेतृत्व में दर्शन करने पहुंचे। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के महामंत्री सत्यम शिवम सुंदरम ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि मुस्लिम राष्ट्रीय युवा मंच के कार्यकर्ता आज अपने पूर्वज के यहां दर्शन पूजन करने आए हैं। हम सभी लोगों के पूर्वज बाबा विश्वनाथ है। हम सभी मुस्लिम भाई सनातनी है। इसलिए हम सभी लोग आज अपने पूर्वज विश्वनाथ के दर्शन के लिए काशी पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि हम लोग विदेशी संस्कृति एवं विदेशी भाषा की गुलामी से निकल करके सामाजिक समरसता बहती थी वही संदेश सनातनी मुसलमान देना चाहते है।

वाराणसी में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की उपज जल्दी ही विदेश भेजी जाएगी। स्वयंसेवी महिलाएं सिंघाड़ा और केले की खेती करेंगी जिसे निर्यात किया जाएगा। विभिन्न विभागों द्वारा तैयार 511 तालाबों में सिंघाड़ा की खेती होगी। केले की खेती भी की जाएगी। इन महिलाओं को सरकार विशेषज्ञों से प्रशिक्षण भी दिलवाएगी। सीडीओ हिमांशु नागपाल ने बताया कि 5 वर्षों में 511 तालाब बनाए गए हैं। चयनित तालाब समूह की महिलाओं के घर के आस- पास हो, तालाब पूजा के लिए न इस्तेमाल हो रहा हो, तालाब के पास मंदिर न हो इन बातों का भी ध्यान रखा जा रहा है।

जिला पूर्ति अधिकारी उमेश कुमार ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार प्रति राशन कार्डधारक 10 किग्रा० के कैरी बैग का 608 बेल्स (608000 अदद बैग्स) जनपद के भारतीय खाद्य निगम गोदाम पर उपलब्ध कराया जायेगा, जिसका उचित दर विक्रेताओं के माध्यम से प्रत्येक राशन कार्डधारको को 10 किग्रा० का 01-01 कैरी बैग का निःशुल्क वितरण कराया जायेगा। उन्होने बताया कि जनपद वाराणसी में 250 बेल्स (250000 अदद बैग्स) का आमद एफसीआई डिपों मण्डुआडीह पर हुआ है, जिसका वितरण नोडल अधिकारी आनंद कुमार यादव, क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी द्वारा 28 फरवरी तक विकास खंड अराजीलाईन को 65773, प्रखंड कोतवाली को 26385, चेतगंज को 30219, चौक को 14676, भेलूपुर को 41873, जैतपुरा को 22523 तथा कलेक्ट्रेट प्रखंड को 48551 सहित कुल 250000 बैग्स निर्गत किया जा चुका हैं।उन्होने निर्गत कैरी बैग्स के सम्बन्ध में उपर्युक्त विकास खण्ड/प्रखण्ड के राशन कार्डधारकों को बताया है कि वह अपने-अपने उचित दर विक्रेता से सम्पर्क एवं समंवय स्थापित करते हुए का 01-01 कैरी बैग निःशुल्क प्राप्त कर लें। उक्त के साथ ही निकट भविष्य में प्राप्त होने वाले कैरी बैग्स का निःशुल्क वितरण अन्य शेष विकास खण्ड/प्रखण्ड को निर्गत करते हुए वितरण कराया जायेगा।

डिजिटल हो रही दुनिया के साथ अगर अब चलना है तो हर व्यवस्था को डिजिटल करते हुए पब्लिक को ज्यादा से ज्यादा फायदा पहुंचाने का काम सरकारों को भी करना होगा. कुछ ऐसी ही डिजिटल व्यवस्था के तहत सबसे पुरानी सिटी के रूप में माने जाने वाले वाराणसी का अब डिजिटल 3D स्वरूप तैयार होने जा रहा है. साधारण भाषा में कहें तो वाराणसी का ही जुड़वा स्वरूप डिजिटल रूप में देखने को मिलेगा. इसके एक नहीं अनेक फायदे होंगे और बनारस देश का ऐसा पहला शहर है, जिसका 3D ट्विन मैप बनाया जा रहा है. लगभग 6 करोड़ रुपये की लागत से हवा-पानी और सड़क के अलावा संकरी पतली गलियों के शहर बनारस में पैदल घूम घूम कर इस 3D मैप को तैयार किया जाएगा.वाराणसी स्मार्ट सिटी के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शाकंभरी नंदन सोंथालिया ने बताया कि प्रदेश सरकार काशी का जल्द ही डिजिटल प्रतिरूप काशी का प्रतिरूप बनवाने जा रही है. इस प्रोजेक्ट का इनॉग्रेशन भी हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने वाराणसी दौरे पर किया था. यह डिजिटल प्रतिरूप थ्री-डी रूप में दिखेगा. देश में वाराणसी पहला शहर होगा जिसका 3D ट्विन मैप तैयार किया जा रहा है. 3-डी अर्बन स्पेशियल डिजिटल ट्विन से एक-एक गली, प्रमुख स्थानों समेत पूरी काशी दिखेगी. शाकंभरी नंदन के अनुसार इस मैपिंग का बहुत सा फायदा होने वाला है. थ्री डी जीआईएस से काशी के विकास का खाका आसानी से खींचा जा सकेगा. इससे मूलभूत सुविधाओं को सुदृढ़ बनाना आसान हो जाएगा. इसके अलावा बाढ़, क्राउड मैनेजमेंट के साथ ही सुरक्षा के लिए ये तकनीक बेहद कारगर साबित होगी. शहर के विकास के लिए काम करने वाली सरकारी संस्थाओं के एक क्लिक पर शहर का थ्री डी मैप सामने होगा,जिससे विकास की रणनीति बनाना आसान होगा. वाराणसी स्मार्ट सिटी इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर चुका है. सभी विभागों के साथ कोऑर्डिनेटर करते हुए 3-डी जीआईएस मैपिंग का काम जल, थल और नभ तीनों से होगा. इसके लिए सर्वे भी पहली फरवरी से शुरू हो चुका है. 3-डी अर्बन स्पेशियल डिजिटल ट्विन बनाए जाने से वाराणसी के विकास की योजना बनाने में काफी आसानी होगी.

उत्तर प्रदेश दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा वाराणसी के काशी हिंदू विश्वविद्यालय के स्वतंत्रता भवन में तीन दिवसीय दिव्या कल समागम का आयोजन किया गया तीन दिवसीया चलने वाले इस कार्यक्रम में पूरे प्रदेश भर से विभिन्न संस्थाएं जो दिव्यांगता के क्षेत्र में काम कर रही है दिव्यांगजनों को सशक्त कर रही है और दिव्यांग जनों द्वारा बनाए गए प्रोडक्ट के साथ यहां आई हुई थी। यहां पर दिव्यांग जनों द्वारा आधुनिक उपकरणों के स्टाल भी लगाए गए थे इसके साथ ही दिव्यांग जनों द्वारा बनाए गए खाद्य सामग्री, हस्तशिल्प के साथ ही उनके द्वारा बनाई गई। पेंटिंग को भी प्रदर्शित किया गया था बड़ी संख्या में लोग इस प्रदर्शनी में आए और लोगों ने दिव्यांगजनों द्वारा बनाए गए उत्पादों को खरीद भी जिससे दिव्यांग जनों में काफी खुशी देखी गई

पर से लाचार है पर चला रहे हैं पूरा परिवार, जी हम बात कर रहे हैं उत्कर्ष जी की जो की एक छोटी सी किराने की दुकान चला हैं पांडेपुर में, उत्कर्ष जी का कहना है कि भले ही मैं पैर से लाचार हूं पर मैं अपने परिवार के लिए इस दुकान को चलाता हूं और मुझे खुद पर गर्व भी महसूस होता है, मेरी पत्नी का भी पूरा सहयोग रहता है, इस दुकान को चलाने में मेरे साथ कभी-कभी मेरे बच्चे भी बहुत हद तक मदद कर देते हैं, इस दुकान से ही मैं अपने पूरे परिवार का खर्चा निकलता हूं, कोई भी बाहरी सहयोग मुझे नहीं लेना पड़ताह, मेरा पर भले ही मेरा साथ ना दे पर मेरा परिवार मेरे साथ है