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झारखण्ड राज्य से छत्रधारी सिंह ,हेलो आरोग्य के माध्यम से बताते है कि इनके ग्राम में विधवा पेंशन के तहत बहुत लोगों को लाभ मिल रहा है। ये लोगों को जागरूक भी कर रहे है और इस पेंशन के तहत अभी तक कोई समस्या नहीं हो रही है। जिनकी मृत्यु तुरंत हुई है ,उनकी मृत्यु प्रमाण पत्र ,मोबाइल नंबर ,फोटो ,आधार कार्ड ,बैंक पासबुक के ज़रिये महिलाओं का विधवा पेंशन के लिए आवेदन किया जाता है
झारखण्ड राज्य के कोडरमा ज़िला के जोड़ासिमर ग्राम से छत्रधारी सिंह ,हेलो आरोग्य के माध्यम से बताते है कि इनके ग्राम के स्कूल में सभी बच्चों को अच्छे से मध्याह्न भोजन मिलता है।बच्चों को पोषक आहार जैसे अंडा ,सोयाबीन ,हरी साग सब्ज़ी दी जाती है। बच्चों को भोजन के साथ फ़ल जैसे केला ,सेब भी मिलता है। स्वाद की बात करे तो शिक्षक पहले चखते है तब जा कर बच्चों को परोसा जाता है
हमारी श्रोता गायत्री देवी ,हेलो आरोग्य के माध्यम से कहती है कि 0-6 माह के बच्चे को केवल स्तनपान करवाना चाहिए ताकि बच्चा स्वस्थ रहे। माँ का दूध बच्चों को शक्ति प्रदान करने के लिए काफ़ी है । पानी बिलकुल नहीं पिलाना चाहिए। ऐसा करने पर बच्चा को दस्त या उलटी की समस्या हो सकती है।6 माह के ऊपर के बच्चों को माँ के दूध के साथ ऊपरी आहार देना चाहिए।
मसनौली ग्राम से संगीता देवी ,हेलो आरोग्य के माध्यम से बताती है कि बाल विवाह नहीं होना चाहिए। अगर विवाह हो जाता है तो उन्हें जल्दी गर्भ धारण नहीं करना चाहिए। कम उम्र में माँ बनने से जच्चा और बच्चा दोनों की जान को ख़तरा रहता है इसके लिए आशा दीदी से सलाह जरूर लेना चाहिए। गर्भ निरोधक गोलियों का प्रयोग करना चाहिए। पति पत्नी की आपसी सहमति से पहला बच्चा 21 वर्ष के बाद ही करना चाहिए और दो बच्चों के बीच तीन वर्ष का अंतराल रखना चाहिए ताकि बच्चा कुपोषित न हो और स्वस्थ रहे
हमारी श्रोता सविता कुमारी ,हेलो आरोग्य के माध्यम से कहती है कि उनके क्षेत्र में बाल विवाह और बाल मज़दूर बहुत होते है। गरीबी के कारण बच्चे होटल ,ईंट भट्टे पर जाते है और अभ्रक चुनने का काम करते है। इसलिए महिलाओं को बाल मज़दूरी के बारे में समझाती है। बच्चों को अभ्रक चुनने का काम करने नहीं बल्कि पढ़ाई के लिए विद्यालय भेजना चाहिए। परिवार वाले पैसों की लालच में अपने बच्चों के भविष्य पर विचार नहीं करते है। अगर बच्चे मज़दूरी करते रहे तो उनका भविष्य बर्बाद हो जाएगा
हमारी श्रोता गायत्री देवी ,हेलो आरोग्य के माध्यम से कहती है कि बाल मज़दूरी बच्चों के भविष्य को बर्बाद कर देती है।18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए शिक्षा ज़रूरी होती है न की मज़दूरी। लेकिन बहुत ऐसे माता पिता होते है जो ग़रीबी के कारण बच्चों को पढ़ा नहीं पाते है और अब्रक चुनने ,गेरज,कारखानों आदि में काम करवाने के लिए भेज देते है। बाल मज़दूरी कानूनी अपराध है जिस कारण बच्चों का भविष्य ख़राब हो जाता है। बच्चे को हमें ज़्यादा से ज़्यादा पढ़ाई करवानी चाहिए। ताकि बच्चे का भविष्य अच्छा बने
झारखण्ड राज्य के कोडरमा जिला के मसनोडीह से हमारी श्रोता हेलो आरोग्य के माध्यम से बताना चाहत है की, माता पिता के द्वारा ढीबरा चुनने, होटल में काम करने, या किसी के घर में काम पर लगा दिया जाता है। अन्य राज्यों में जा कर ये बच्चे मजदूरी करते है। माता पिता को ऐसा नहीं करना चाहिए, ऐसा करने से बच्चो का विकाश नहीं होता है, बच्चे अशिक्षित रह जाते है, अपने पेअर पर खड़ा नहीं हो पाते है। मजदूरी करते हुए अगर किसी बच्चे का बचपन गुजर गया तब वो आगे कुछ नहीं कर पात है। जिस उम्र में उस बच्चे को अपना भविष्य बनान चाहिए, शिक्षा ग्रहण करना चाहिए उस उम्र में वो मजदूरी करता है। इसलिए सभी माता पिता अपने बच्चे से बाल मजदूरी ना करवाए, उन्हें शिक्षा दे ताकि वो आगे कुछ कर सके
जौनपुर से शभनम खातून ,हेलो आरोग्य के माध्यम से कहती है कि इन्होने महिलाओं के साथ बाल मज़दूरी पर बात की कि बाल मज़दूरी करवाना अपराध है। आज के युग में शिक्षा बहुत ज़रूरी है ,बच्चों को शिक्षा दिलवाना बहुत ज़रूरी है जिससे बच्चों का भविष्य उज्जवल हो। शिक्षा नहीं रहने से बच्चों का विकास नहीं हो पाता है। महिलाओं के अनुसार अभिभावक अपने बच्चों को मज़बूरन मज़दूरी करवाने भेजते है ताकि ग़रीबी दूर हो और घर की स्थिति सुधरे। ग़रीबी बहुत है ,गरीबी के कारण ही शिक्षा से वंचित रह जाते है बच्चे
मासनोड़ि से सोनू कुमार मोबाइल वाणी के माध्यम से कह रहे है कि किसी भी बच्चे से बाल मजदूरी कराना अपराध है। बच्चों से बाल मजदूरी कराने पर बच्चे न ही शिक्षित हो पाएंगे और न ही अच्छे से विकसित हो पायेगें। पांच से अठारह साल तक के बच्चों से नियमित काम कराना बाल मजदूरी कहलाता है।बच्चे आने वाले कल का भविष्य हैं लेकिन कुछ मजबूरी में बाल मजदूरी करना पड़ता है। इन बच्चों को बचपन से ही परिवार की ज़िम्मेदारी उठानी पड़ती है। कुछ माँ -बाप ऐसे होते हैं जो बच्चे के बचपन को छीन कर उनसे मानसिक तथा सामाजिक रूप से काम पर लगा कर प्रताड़ित करते हैं। साथ ही काम के बदले में कम रूपए देकर शोषण करना तथा उनके बचपन को श्रमिक रूप में बदलना बाल मजदूरी कहलाता है।
