झारखण्ड राज्य के कोडरमा ज़िला से शभनम ख़ातून ,हेलो आरोग्य के माध्यम से कहती है कि उन्हें हेलो आरोग्य से सीख मिला है। वो ग्रामीण महिलाओं के बीच जा कर लड़कियों की शादी की उम्र को लेकर बात करती है। महिलाओं का कहना है कि सरकार का फ़ैसला बहुत अच्छा है। पहले लड़कियों की कम उम्र में शादी हो जाने से वो मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ नहीं रहती थी। जल्दी माँ बन जाने के कारण उनके शरीर को कई बीमारियाँ घात करने लग जाता था। लड़कियाँ सही गलत का फ़ैसला नहीं कर पाती थी। ये महिलाएँ कहती है कि वो अपनी बेटियों की शादी 21 वर्ष में ही करेगी ताकि बेटियाँ अपने जीवन का फ़ैसला खुद कर लेगी
