छत्तीसगढ़ राज्य के राजनंदगांव जिला से वीरेंदर , मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि मानसिक रोग को लेकर समाज व शिक्षित लोग भी जागरूक नहीं है। लोग शारीरिक रोग समझ जाते है लेकिन मानसिक बीमारी को लोग बीमारी नहीं मानते क्योंकि लोग इसके बारे में सुने नहीं है और जानते नहीं है। जैसे बच्चा जिसका विकास नहीं हो पाता है ,शरीर तो बढ़ता है पर मानसिक रूप से बच्चा ही रहता है ,तो ऐसे में लोग उसे पागल समझते है। वही बड़ा होने पर पारिवारिक स्थिति आने पर जब कोई मानसिक रोगी हो जाता है जिसे दवाई की ज़रुरत पड़ जाती है तो ऐसे में उन्हें प्यार की भी ज़रुरत होती है। लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है ,लोगों को कार्यशाला के माध्यम से समझना होगा की मानसिक रोग भी एक बीमारी है और ऐसे लोगों को समझना और प्यार देना ज़रूरी है
