छत्तीसगढ़ राज्य के राजनंदगाँव ज़िला से वीरेंदर ,मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि प्रकृति का संतुलन मनुष्यों ने ही बिगाड़ा है। पहले के समय में मशीन नहीं थी। मनुष्य विकास के लिए मशीन बनाया और विकास के नाम पर प्रकृति को प्रभवित किया। इसलिए प्रकृति का प्रकोप है कि कही तेज़ बारिश होती है तो कही होती ही नहीं है। और जो भी प्राकृतिक आपदा आती है ,वो प्रकृति का क्रोध है। अगर प्रकृति को नुक्सान पहुँचाएगे तो प्रकृति हमे नुक्सान पहुँचाएगा। मनुष्यों को अभी चेतना होगा और प्रकृति को बचाना होगा
