नगर पालिका उपाध्यक्ष के आरोपों पर अध्यक्षता का परिवार

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संपूर्ण विश्व में प्रकृति और पुरूष अर्थात जड़ और चेतन दो तत्वों की सत्ता है। इन दो गुण धर्मो से पृथक किसी तीसरे तत्व की अनुभूति किसी को नहीं होती। परंपरा से चली आरही कहानियों पर भरोसा कर मनुष्य पूर्वग्रहरहित और निष्पक्ष होकर प्रकृति के गुण धर्मो का अध्ययन नहीं करना चाहता। क्यों कि इससे उसके दैवीय कल्पना का महल ध्वस्त होन लगता है। इस लिए वह परंपरा में मिली बातों पर भरोसा करने लगता है। भूत-प्रेत, जिन्द, चुडैल, मरी-मशान, ब्रम्ह राक्षस आदि का कही कोई अस्तित्व नहीं है। फिर भी परंपरा में सुनी सुनाई बातो एवं अज्ञानवश मनुष्य भू-प्रेत आदि के भ्रम में पड़ा हुआ है श्री लंका के डाॅ अब्राहम कोवूर और अमेरिका के जेम्स रैंडी ने भूत के दावेदारों को खुल चुनौती दे रखी थी । अमेरिका में दि कमेटी फाॅर दिसाइंटिफिक इन्वेस्टीगेशन ऑफ दि क्लेम्स ऑफ दि पैरानाॅर्मल नाम की वैज्ञानिक संस्था ने भूत के तत्थों को बेनकाब किया है। आज तक तमाम दावेदार भूत का अस्तीत्व होने की कसौटी पर खरे नहीं उतर पाए है। महाराष्ट्र की अखिल भारतीय अंधश्रद्धा निमूर्लन समिति भूत दिखाओ 21 लाख का इनाम ले जाओं घोषणा करते आ रही है लेकिन आब तक काई भूत नहीं दिखा पाया है।

128 साल बाद ओलंपिक में क्रिकेट की वापसी मुक्केबाजी पर मंडराया बाहर होने का खतरा

वर्ल्ड कप का पहला मैच खेलने पर संशय ऑस्ट्रेलिया से 8 अक्टूबर को बढ़ेगी टीम

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ग्राम वाणी की इंटरव्यू सीरीज "क्या हाल विधायक जी, में आज हमारे साथ हैं नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 121 से विधायक श्रीमती सुनीता पटेलl श्रीमती सुनीता पटेल पिछले पांच वर्षों से गाडरवारा से कांग्रेस का प्रतिनिधित्व कर रही हैंl

समाज में बढ़ते आधुनिकतावाद में आस्था व अंघविश्वास से जुड़े विषय भी फैशन का जगह ले लेते है। पैर में काला धागा बांधने का समाज में फैशन सा चल पड़ा है। माना जाता है कि पैरों में काला धागा पहनने से बुरी नजर नहीं लगती है। इस के साथ नकारात्मक उर्जा कोसों दूर रहती है, जिस से स्वास्थ्य और तरक्की पर बुरा असर नहीं पड़ता है। काला धागा पांव में बांधने के वर्तमान में चाहे जो भी कारण हो लेकिन यह हमारी अंधविश्वासी सोच व मानसिकता गुलामी को दर्शाता है। आज भले शुद्रों को अपनी पहचान के लिए काला धागा नहीं बांधना पड़ रहा हो लेकिन ज्यादातर लोग बुरी आत्मा, बुरी शक्तियों से बचने अपने पांव में काला धागा बांध रहे है। 21 वी सदी के वैज्ञानिक युग में भी हम पुरानी दकियानुसी, गुलामी या जातियों के श्रेणी में अछुत होने की पहचान रखने का काला धागा अपने पांव में बांध रहे है।

भारत आज खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर है, लेकिन हमेशा से ऐसा नहीं था, एक समय ऐसा भी देश खैरात में मिले अमेरिका के सड़े हुए गेहूं पर निर्भर था। देश की इस आत्मनिर्भरता के पीछे जिस व्यक्ति की सोच और मेहनत का परिणाम है मनकोम्बु संबासिवन स्वामिनाथन जिसे बोलचाल की भाषा में केवल स्वामीनाथन के नाम से जाना जाता था। कृषि को आत्मनिर्भर बनाने वाले स्वामीनाथन का 28 सितंबर 2023 को 98 साल की उम्र में निधन हो गया। उनका जन्म 7 अगस्त 1925, को तमिलनाडु के कुम्भकोण में हुआ था। स्वामीनाथन को देश में हरित क्रांति का जनक कहा जाता है, जिन्होंने देश की कृषि विकास में अहम योगदान माना जाता है। कृषि सुधार और विकास के लिए दशकों पहले दिए उनके सुझावों को लागू करने की मांग आज तक की जाती है। हालिया कृषि आंदोलन के समय जब देश भर के किसान धरने पर थे तब भी स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की मांग उठी थी, जिसे सरकार ने सिरे से खारिज कर दिया, जबकि यह वही सरकार है जिसने चुनावों के पहले किसानों को वादा किया था कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने का वादा किया था।

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