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भारत में 13.9 करोड़ से भी ज्यादा लोग 60 वर्ष की उम्र में प्रवेश कर चुके हैं ऐसे में इनकी देखरेख औरसुविधा का ध्यान रखना सिर्फ बेटों का कर्तव्य ही नहीं बल्कि बेटियों का भी कर्तव्य है और इस बात पर नई सदी में तो और भी जोर दिया जाना चाहिए क्योंकि नई सदी में महिलाओं के अधिकारों का और उनकी स्वतंत्रता का ज्यादा ध्यान रखा गया है और उनको अधिकार गए हैं!!

शरीर में देवी-देवताओं का प्रवेश होना बताने वाली महिला द्वारां विशेष आवाज बनाकर निकालना, घूमना, आरती के समय नाचना जेसी गतिविधियां की जाती है। इसी दौरान भक्तों के सवालों के जबाब दिए जाते है। बीमारी तथा दूःख दूर करने के लिए नींबू, धागा, ताबीज़, आदि देकर समस्या से मुक्ति दिलाने का दावा किया जाता है। इस तरह का कार्य करने वाले मांत्रिक-तांत्रिक, भगत, पंडा, बाबा, देवी सभी ढोंगी होते है। देवी-देवता शरीर में आने के संबंध में मनोविज्ञानिकों का कहना है कि यह हिस्टेरिया है। यह मनोविज्ञानिक बीमारी है। जो अकसर उन महिला में या पुरूषों में होती है जो की विशेष परिस्थित से या तनाव से गुजर रहे है। एक्सपर्ट यह भी मानते है कि लगातार किसी मंत्र, भजन, तबले या ढोलक की आवाज की वाईब्रेषन से भी ऐसा होता है। यह आवाजे अंतरमन को सूचनाएं देती है और पहले से ही परेशान महिला या पुरूष अजीब व्यवहार करने लगते है। इसे साईकाॅलाजी की भाषा में पेजेशन सिंड्रोम कहते है।

मेंहदी लगाकर किया मतदान के लिए जागरूक।

गुना से पन्नालाल के नाम पर लगी मोहर।

"गांव आजीविका और हम" कार्यक्रम के तहत हमारे कृषि विशेषज्ञ श्री जीवदास साहू मटर की खेती के बारे में जानकारी दे रहे है । मटर की खेती के लिए अच्छे बीज,खाद सहित अन्य जानकारियों के लिए ऑडियो पर क्लिक करें...