कोरोना मामलों में कमी आने के बाद चरणबद्ध तरीके से अर्थव्यवस्था को खोलने और प्रतिबंधों को खत्म किए जाने के बावजूद मनरेगा के तहत काम मांगने वालों की संख्या में बढ़ोतरी ही हो रही है. इस ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत हर महीने करीब दो करोड़ या इससे अधिक परिवार काम मांग रहे हैं.विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
देश में फर्जीवाड़ा कोई नई समस्या नहीं बल्कि लंबे समय से चलती आ रही एक पुरानी समस्या है. देश के अलग-अलग हिस्सों से आए दिन फर्जीवाड़े की कोई न कोई खबर सामने आती रहती है. इसी बीच देश की राजधानी दिल्ली में आयुष्मान भारत और प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के नाम पर लोगों को बेवकूफ बनाकर झूठा रोजगार अभियान चलाया जा रहा है. इस झूठे अभियान के तहत पैसों के बदले लोगों को नौकरी देने का वादा किया जा रहा है.
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भारत में कोरोना वायरस का कहर लगातार जारी है. बीते 24 घंटे में देशभर से कोरोना के 12,143 नए मामले सामने आए हैं. इन नए मामलों के साथ ही देशभर में कोविड-19 के कुल मामलों की संख्या 1,08,92,746 हो गई है. देशभर में महामारी की वजह से अभी तक 1,55,550 लोगों की मौत हो चुकी है। विस्तृत जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें।
नए शोध से पता चला है कि भारत में महिलाओं को कोरोनावायरस महामारी के दौरान पुरुषों की तुलना में बहुत अधिक नुकसान हुआ है. पहले से ही महिलाएं लिंग आधारित असमानताओं का सामना करतीं हैं, उसके ऊपर कोरोना ने इन्हें आर्थिक रूप से गरीबी में धकेल दिया है। इस खबर को सुनने के लिए ऑडियो पर क्लिक करें।
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पेट्रोल-डीजल के भाव अब तक के सर्वोच्च स्तर पर जा रहे हैं. आज से ही एलपीजी सिलेंडर के भाव 50 रुपये बढ़ चुके हैं,प्याज और सब्जियां भी आम आदमी की थाली से दूर जाने लगी हैं. दिसंबर में थोक महंगाई दर 1.5% थी जो जनवरी में बढ़कर 2.03 फ़ीसदी हो गई है. अगर मैन्युफैक्चर प्रोडक्ट की बात करें तो दिसंबर में इसकी महंगाई 4. 24 फीसदी थी जो जनवरी में बढ़कर 5.13 फ़ीसदी हो गई है. जनवरी में खाद्य महंगाई में वास्तव में 2.24 फ़ीसदी की कमी आई थी.विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
भारत में पोषाहार की स्थिति लगातार चिंता का विषय बनी हुई है. सन 2000 के मध्य में पोषाहार की मांग बढ़ने के अनुपात में खर्च की स्थिति को सुधारने की अल्प अवधि के बाद, इस मद में बजट आवंटन को एक तरह से रोक दिया गया है.अब देश के ज्यादातर हिस्सों में पोषाहार मानकों में भारी गिरावट आई है. इसका सीधा संबंध पोषाहार और स्वास्थ्य की देखभाल के लिए किए जाने वाले खर्च में कमी से है.
टीकाकरण की दूसरी खुराक छूटी तो कोरोना से बचाने वाले टीके का सुरक्षा कवच कमजोर हो जाएगा। देश में तेजी से टीकाकरण कराकर संक्रमण को काबू करने के प्रयास में लगी सरकार इस बात को लेकर चिंतित है। दो दिन पहले देश में उन लोगों को टीके की दूसरी खुराक मिलना शुरू हो गई, जिन्होंने सबसे पहले टीके की पहली खुराक ली थी। पर दिल्ली समेत कई राज्य व केंद्र शासित प्रदेशों में दूसरा टीका लगवाने आने वालों की तादाद बहुत कम है। ऐसे में स्वास्थ्य विशेषज्ञ चिंता व्यक्त कर रहे हैं कि कहीं यह लापरवाही संक्रमण पर भारी न पड़ जाए।विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
